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- 15 लाख की लागत से बने अतिरिक्त कमरे दो साल में हो गए जर्जर
15 लाख की लागत से बने अतिरिक्त कमरे दो साल में हो गए जर्जर
भास्कर संवाददाता - दमोह
स्थानीय शासकीय एक्सीलेंस स्कूल के एग्रीकल्चर विभाग में करीब दो साल पहले 15 लाख 36 रुपए की लागत से बनाए अतिरिक्त कक्ष जर्जर हो गए हैं। कमरों के फर्श उखड़ गए हैं। टाइल्स टूट गए हैं। गैलरी में बिछाए टाइल्स भी उखड़ गए हैं। दीवारों का प्लास्टर भी झडऩे लगा है। गैलरी के पिलर हिलने लगे हैं।
कक्षों की खस्ता हाल स्थिति के बावजूद विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है। क्लासों में पढ़ाने वाले शिक्षक ठीक से खड़े नहीं हो पाते।
ब्लेक बोर्ड के नीचे फर्श पूरी तरह से उखड़ गया और टूटी टाइल्स के टुकड़े पड़े होने से पैर रखने में शिक्षकों को दिक्कत होती है। कमरों की जर्जर हालत के कारण सफाई भी नहीं होती। स्कूल ल प्रबंधन के पास दो साल पहले पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए अतिरिक्त कक्षों की जानकारी नहीं है।
जर्जर कमरों में लग रहीं तीन कक्षाएं
कमरों की जर्जर हालत के बावजूद यहां मॉडल स्कूल की 9वीं, 10वीं एवं 11वीं कक्षा लगाई जा रही हैं। जिनमें 9वीं में 80, 10वीं में 73 व 11वीं में 53 विद्यार्थी बैठ रहें हैं। छात्रा यास्मीन, आशु, नेहा, छात्र अतुल खरे, शिवंाश, पारस ने बताया कि कमरों के अंदर जाते ही उखड़े पड़े टाइल्स पैर में लगते हैं। सीढिय़ां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिससे कई बार वे गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। दीवारों का प्लास्टर झडऩे के कारण चेयर दीवार से दूर रखना पड़ती है। कृषि संकाय इंचार्ज जीपी सक्सेना ने बताया कि ब्लेक बोर्ड के नीचे फर्श पूरी तरह से उखड़ा है। चटकी हुई टाइल्स लगी हैं। जिससे शिक्षकों को पढ़ाई कराते समय परेशानी होती है। वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते। मजबूरी में बच्चों को यहां बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। क्योंकि बच्चे ज्यादा है और कमरों की संख्या कम है। एक नया कमरा कुछ महीने पहले बना है। जिसमें अभी क्लास नहीं लग रही है। टायलेट आदि की भी व्यवस्था नहीं है।
टायलेट एवं पानी की व्यवस्था करनी थी
शासकीय एक्सीलेंस स्कूल कृषि संकाय में आर्ट एंड क्राफ्ट रूम के साथ टायलेट एवं पीने के पानी की व्यवस्था कराई जाना थी, लेकिन यहां केवल तीन कमरों का निर्माण ही किया गया। जिनकी लागत 15 लाख 36 हजार रुपए बताई गई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कमरों का निर्माण कार्य 13 जनवरी 2012 को पूरा हो गया था और 15 फरवरी को स्कूल के हैंडओवर कर दिया गया था। यहां न तो टायलेट का निर्माण हुआ और न ही पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। नवनिर्मित कक्षों की हालत जर्जर हो गई है।
सुधार कार्य के लिए पत्राचार किया
अतिरिक्त कक्षों की जर्जर हालत के संबंध में स्कूल प्रबंधन ने पीडल्ब्यूडी को लिखा है। प्राचार्य केके पांडे ने बताया कि जब अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया गया था। उस समय एसके नेमा स्कूल प्राचार्य थे। उन्हीं के समय कार्य पूरा हुआ था। उन्हीं के समय इन्हें हैंडओवर किया गया था। स्कूल में कमरों के संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं है। एक बार पत्राचार जरूर किया गया। जिसमें कमरों की हालात सुधारने के लिए कहा है। वहीं डीईओ एसके नेमा ने बताया कि सारा रिकॉर्ड स्कूल में ही रहता है उनके पास कोई जानकारी नहीं होती।
मामला काफी पुराना है
॥ राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के अंतर्गत कमरे बनाए गए होंगे। मामला 5-6 साल पुराना है। मैं उसके संबंध में छानबीन नहीं करूंगा। मंैने एक्सीलेंस स्कूल का विजिट किया था। निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। यदि कोई गड़बड़ी होती है, तो उसको हैंडओवर नहीं करते। ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई। यदि शिकायत आती है तो जांच कराई जाएगी।॥एके सिंह, कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग
मुझे कोई जानकारी नहीं
॥स्कूल में अतिरिक्त कक्ष कब बने कब हैंडओवर किए गए इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है। सारी जानकारी स्कूल प्राचार्य के पास रहती है। मेरे समय भले ही कमरों का निर्माण हुआ हो, लेकिन रिकॉर्ड स्कूल के पास होता है।॥एसके नेमा, डीईओ
मामला काफी पुराना है
॥ राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के अंतर्गत कमरे बनाए गए होंगे। मामला 5-6 साल पुराना है। मैं उसके संबंध में छानबीन नहीं करूंगा। मंैने एक्सीलेंस स्कूल का विजिट किया था। निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। यदि कोई गड़बड़ी होती है, तो उसको हैंडओवर नहीं करते। ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई। यदि शिकायत आती है तो जांच कराई जाएगी।॥एके सिंह, कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग
मुझे कोई जानकारी नहीं
॥स्कूल में अतिरिक्त कक्ष कब बने कब हैंडओवर किए गए इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है। सारी जानकारी स्कूल प्राचार्य के पास रहती है। मेरे समय भले ही कमरों का निर्माण हुआ हो, लेकिन रिकॉर्ड स्कूल के पास होता है।॥एसके नेमा, डीईओ
सुधार कार्य के लिए पत्राचार किया
अतिरिक्त कक्षों की जर्जर हालत के संबंध में स्कूल प्रबंधन ने पीडल्ब्यूडी को लिखा है। प्राचार्य केके पांडे ने बताया कि जब अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया गया था। उस समय एसके नेमा स्कूल प्राचार्य थे। उन्हीं के समय कार्य पूरा हुआ था। उन्हीं के समय इन्हें हैंडओवर किया गया था। स्कूल में कमरों के संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं है। एक बार पत्राचार जरूर किया गया। जिसमें कमरों की हालात सुधारने के लिए कहा है। वहीं डीईओ एसके नेमा ने बताया कि सारा रिकॉर्ड स्कूल में ही रहता है उनके पास कोई जानकारी नहीं होती।
टायलेट एवं पानी की व्यवस्था करनी थी
शासकीय एक्सीलेंस स्कूल कृषि संकाय में आर्ट एंड क्राफ्ट रूम के साथ टायलेट एवं पीने के पानी की व्यवस्था कराई जाना थी, लेकिन यहां केवल तीन कमरों का निर्माण ही किया गया। जिनकी लागत 15 लाख 36 हजार रुपए बताई गई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कमरों का निर्माण कार्य 13 जनवरी 2012 को पूरा हो गया था और 15 फरवरी को स्कूल के हैंडओवर कर दिया गया था। यहां न तो टायलेट का निर्माण हुआ और न ही पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। नवनिर्मित कक्षों की हालत जर्जर हो गई है।
जर्जर कमरों में लग रहीं तीन कक्षाएं
कमरों की जर्जर हालत के बावजूद यहां मॉडल स्कूल की 9वीं, 10वीं एवं 11वीं कक्षा लगाई जा रही हैं। जिनमें 9वीं में 80, 10वीं में 73 व 11वीं में 53 विद्यार्थी बैठ रहें हैं। छात्रा यास्मीन, आशु, नेहा, छात्र अतुल खरे, शिवंाश, पारस ने बताया कि कमरों के अंदर जाते ही उखड़े पड़े टाइल्स पैर में लगते हैं। सीढिय़ां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिससे कई बार वे गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। दीवारों का प्लास्टर झडऩे के कारण चेयर दीवार से दूर रखना पड़ती है। कृषि संकाय इंचार्ज जीपी सक्सेना ने बताया कि ब्लेक बोर्ड के नीचे फर्श पूरी तरह से उखड़ा है। चटकी हुई टाइल्स लगी हैं। जिससे शिक्षकों को पढ़ाई कराते समय परेशानी होती है। वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते। मजबूरी में बच्चों को यहां बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। क्योंकि बच्चे ज्यादा है और कमरों की संख्या कम है। एक नया कमरा कुछ महीने पहले बना है। जिसमें अभी क्लास नहीं लग रही है। टायलेट आदि की भी व्यवस्था नहीं है।
एक्सीलेंस स्कूल के एग्रीकल्चर विभाग में दो साल पहले बनाए गए अतिरिक्त कमरे का उखड़ा पड़ा फर्श।