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भरत चक्रवर्ती की दिग्विजयी यात्रा में गूंजे जयघोष

8 वर्ष पहले
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निज संवाददाता. खुरई
मालथौन में आर्यिका प्रभावना मति माता के ससंघ सानिध्य में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवें दिन भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा निकाली गई।
यात्रा में हाथी, घोड़ों पर सवार सौधर्म इंद्र, कुबेर सहित इंद्र-इंद्राणी थे और बग्गी पर चल रहे भरत चक्रवर्ती ने जनता को उपहार बांटे।
शहर भ्रमण के बाद यात्रा बड़े जैन मंदिर पहुंची और विभिन्न कार्यक्रम हुए। रात में सौधर्म इंद्रसभा, नेमी-राजुल बारात, श्रीपाल मैना सुंदरी नाटिका, मां सीता की अग्नि परीक्षा नाटिका का मंचन किया गया।
महामहोत्सव में आर्यिकाश्री भावनामति माताजी, सदयमति माताजी, भक्तिमति माताजी, ब्रम्हचारी योगेश, सनत, ब्रम्हचारिणी रागिनी, रवि दीदी, विधानाचार्य पं. अभिषेक ‘प्रियज’, पं. आशीष ‘सगरा’ ने विधान की क्रियाएं कराई। शनिवार को आर्यिकश्री प्रभावनामति माता ने प्रवचन दिए।
दु:खों का मूल कारण लोभ : अजितसागर महाराज
खुरई. प्राचीन जैन मंदिर मुनिश्री अजितसागर महाराज ने कहा कि दु:खों का मूल कारण तृष्णा और लोभ है। वर्तमान में इंसान पेट भरने के लिए नहीं वरन चौबीस घंटे पेटी भरने के लिए भागम-भाग कर रहा है। वह न तो न्याय-अन्याय को ही देख पा रहा है और न ही नीति-अनीति को। हर इंसान सुख चाहता है परंतु दु:ख को कैसे दूर किया जाए इसका परिपालन करना नहीं चाहता। दृष्टि समीचीन हो तो समाधान मिल ही जाता है। ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज ने कहा कि भक्ति हमेशा वायु की तरह होना चाहिए जो निरंतर प्रवाह कर सबको जीवन प्रदान करती है। हमारी भक्ति वर्षा की तरह कदापि न हो। वर्षा कभी न तो स्थाई रहती है और न ही अडिग ही रहती है। हमें अपना जीवन विवेक, सत्संग, संयम आदि के मार्ग पर लगाने का प्रयास करते रहना चाहिए। गौरतलब है अतिशय क्षेत्र ईसरवारा में बसंत पंचमी पर होने वाले महामहोत्सव में मुनिश्री अजितसागर महाराज, ऐलक विवेकानंद सागर महाराज एवं ब्रम्हचारी रवींद्र, पवन, प्रतिष्ठाचार्य अविनाश ((भोपाल)) शामिल होंगे। यह जानकारी जरुआखेड़ा के देवेंद्र जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपस्थित अशोक जैन शाकाहार ने दी।
बनो तो राम जैसे आज्ञाकारी : दुबे
बंडा. राम ने पिता की आज्ञा का पालन कर राजसी वैभव त्याग दिया। जंगल मेंं जाकर दु:खों को सहन किया पर भगवान को नहीं भूले। यह बात देव जानकी रमण मंदिर में चल रही श्रीराम कथा सुनाते हुए पंडित राधेश्याम दुबे ने कही। उन्होंने कहा रामकथा मानव जीवन की कथा है, उससे हमें सीख लेना चाहिए। राम के आदर्शों को आत्मसात कर यही सीखें कि जीवन में कितने ही दु:ख क्यों न आएं पथ से अडिग नहीं होना चाहिए।
भक्ति के लिए पैसा नहीं, मन चाहिए
दलपतपुर. मन के बिना भक्ति का कोई फल नहीं मिलता। भक्ति के लिए पैसों की नहीं, मन की जरुरत है। यह बात जंगल चौकी परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए कथाचार्य अरविंद भूषण महाराज ने कही। कथा के बीच कृष्ण-रुक्मिणी का विवाह हुआ और भक्तों ने जयकारे लगाए। इस अवसर पर सजीव झांकी सजाई गई।
सहजपुर में श्रीमद् भागवत कथा सात से
सहजपुर. रामलला मंदिर में सात फरवरी से 13 फरवरी तक दोपहर एक से पांच बजे तक श्रीमद् भागवत कथा होगी। कथाचार्य दीपक कुमार शास्त्री हैं। आयोजक दुर्गेश कुमार भोपाल एवं सहजपुर के लोग हैं।