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छेड़छाड़ के आरोपी को १६ महीने की सजा

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - दमोह
विशेष सत्र न्यायाधीश तारकेश्वर सिंह ने एक आरोपी को धारा 452 और एससी-एसटी अधिनियम की धारा में 8-8 महीने की सजा और एक हजार रुपए का जुर्माना किया।
अभियोजन के मुताबिक थाना बटियागढ़ के अंतर्गत आने वाले एक गांव की 26 वर्षीय दलित महिला 12 मई 2013 की शाम करीब 4 बजे अपने घर पर अकेली थी। तभी गांव सिहोरा निवासी आरोपी अनरथ सिंह लोधी ने घर में घुस गया और दुराचार करने के आशय से उसे पकड़ लिया।
महिला के चिल्लाने पर आरोपी भाग गया। दूसरे दिन महिला ने परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद बटियागढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया।
प्रकरण में देर से दर्ज कराई रिपोर्ट को अभियोजन के प्रकरण की सत्यता को संदिग्ध बताया। परंतु कोर्ट ने अपने निर्णय में टिप्पणी करते हुए कि जब स्त्री की लज्जा भंग करने का अपराध घटित होता है। वहां इस बिंदु पर विचार-विमर्श होना कि रिपोर्ट दर्ज कराई जाए अथवा नहीं। इस विचार विमर्श में समय लगने के कारण कई बार रिपोर्ट करने में देर हो जाती है। अत: ऐसे मामलों में एक मात्र विलंब के आधार पर संपूर्ण अभियोजन कथा को संदिग्ध नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से तब तक कि अभियोजन साक्षियों के कथन विश्वसनीय पाए गए हों, जिस पर से कोर्ट ने प्रकरण में मात्र पांच महीने में सुनवाई करते हुए आरोपी अनरथ सिंह को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। प्रकरण में पैरवी विशेष लोक अभियोजक राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने की।



देर से दर्ज रिपोर्ट में प्रकरण की सत्यता संदिग्ध नहीं मान सकते