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पीडब्ल्यूडी को सड़क बनाने से पहले पूरे करने होंगे नए मापदंड

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - दमोह
प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर की गई एक जनहित याचिका के बाद मप्र हाईकोर्ट ने जो निर्देश जारी किए उसको कठोरता से लागू करने के लिए प्रदेश सरकार ने सड़कों के निर्माण को लेकन पीडब्ल्यूडी के लिए नई गाइड लाइन तैयार की है। शासन की इस नई गाइड लाइन के तहत विभाग और ठेकेदार से अलावा भी पूरे सिस्टम में शामिल लोगों की जवाबदेही तय कर दी गई है। ऐसे में भ्रष्टाचार की गुंजाइश तो कम होगी ही, सड़कों की स्थिति भी अब पहले से बेहतर रहेगी और प्रदेश सहित दमोह जिले को टिकाऊ सड़कें मिल सकेंगी। शासन की इस गाइड लाइन का जिले में इंप्लीमेंट शुरू कर दिया गया है।
दमोह जिले में १५ जनवरी के बाद से जो नई सड़कें बनाई जा रही हैं उसमें नए नियमों का पालन करने के लिए ठेकेदारों से लेकर सभी संबंधितों की जवाबदेही तय की जा रही है। लोक निर्माण विभाग के ईई अनिल कुमार सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट द्वारा 20 दिसंबर 2013 को दिए गए निर्देश के परिपालन में 15 जनवरी को शासन से जो आदेश आए हैं उसके तहत अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता में जो भी अधिकारी लापरवाही करेगा उसके खिलाफ मप्र सिविल सर्विसेस आचरण नियम 1966 लागू होगा।
जिसके तहत विभागीय जांच, निलंबन और इंक्रीमेंट रोकने की सजा दी जाएगी। वहीं अब इंडियन रोड कांग्रेस के मापदंडों के अनुसार सड़क की लाइफ 10 से 15 साल के हिसाब से डिजाइन की जाएगी। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाली सड़कें बनेंगी और लोगों को लंबे समय तक उसका लाभ भी मिलेगा। नए नियम के अनुसार अब आवासीय क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी कांक्रीट की नालियां और सड़कें बनाएगा।
कंसल्टेंट और ठेकेदार की भी नई जवाबदेही तय
ईई श्री सिंह के अनुसार नए नियमों के तहत सड़क निर्माण के लिए अब जो भी कंसल्टेंट प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएगा उसको पंजीयन कराकर विभाग के पास सुरक्षा निधि जमा कराना होगी। इसके बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की जो खामियां होंगी उसके लिए कंसल्टेंट जवाबदेह होंगे और उनकी सुरक्षा निधि भी राजसात कर ली जाएगी। इसी तरह पहले रोडों के लिए गारंटी पीरियड 3 साल कहलाता था, लेकिन नए नियम के तहत इसी बढ़ाकर 5 साल किया गया है। साथही सिक्यूरिटी डिपॉजिट 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। गारंटी पीरियड में सड़क नहीं सुधारे जाने पर ठेकेदार की धरोहर राशि भी राजसात कर ली जाएगी। नए नियम के अनुसार सड़क निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए नई लैब एनएबीएल((नेशनल एक्टीबेटेट लैबोरेट्री)) को चिन्हित किया गया है। इस लैबोरेट्री से भी सुरक्षा निधि जमा कराई जाएगी और सेंपल में गड़बड़ी मिलने पर इसकी भी जवाबदेही मानते हुए सुरक्षा निधि राजसात करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा अब सड़क निर्माण की मानीटरिंग के लिए क्वालिटी कंट्रोल कंसल्टेंट नियुक्त किए जाएंगे, जो कार्य का सुपरवीजन करेंगे। इनसे भी परफॉरमेंस सिक्यूरिटी जमा कराई जाएगी। ईई पीडब्ल्यूडी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि विभाग के सचिव से प्राप्त नए आदेशों को जिले में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अब जो भी सड़कें बनाई जाएंगी इन्हीं नियमों के तहत ही उनमें काम होगा।



कंसल्टेंट और ठेकेदार की भी नई जवाबदेही तय

ईई श्री सिंह के अनुसार नए नियमों के तहत सड़क निर्माण के लिए अब जो भी कंसल्टेंट प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएगा उसको पंजीयन कराकर विभाग के पास सुरक्षा निधि जमा कराना होगी। इसके बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की जो खामियां होंगी उसके लिए कंसल्टेंट जवाबदेह होंगे और उनकी सुरक्षा निधि भी राजसात कर ली जाएगी। इसी तरह पहले रोडों के लिए गारंटी पीरियड 3 साल कहलाता था, लेकिन नए नियम के तहत इसी बढ़ाकर 5 साल किया गया है। साथही सिक्यूरिटी डिपॉजिट 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। गारंटी पीरियड में सड़क नहीं सुधारे जाने पर ठेकेदार की धरोहर राशि भी राजसात कर ली जाएगी। नए नियम के अनुसार सड़क निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए नई लैब एनएबीएल((नेशनल एक्टीबेटेट लैबोरेट्री)) को चिन्हित किया गया है। इस लैबोरेट्री से भी सुरक्षा निधि जमा कराई जाएगी और सेंपल में गड़बड़ी मिलने पर इसकी भी जवाबदेही मानते हुए सुरक्षा निधि राजसात करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा अब सड़क निर्माण की मानीटरिंग के लिए क्वालिटी कंट्रोल कंसल्टेंट नियुक्त किए जाएंगे, जो कार्य का सुपरवीजन करेंगे। इनसे भी परफॉरमेंस सिक्यूरिटी जमा कराई जाएगी। ईई पीडब्ल्यूडी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि विभाग के सचिव से प्राप्त नए आदेशों को जिले में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अब जो भी सड़कें बनाई जाएंगी इन्हीं नियमों के तहत ही उनमें काम होगा।

सिक्यूरिटी डिपॉजिट 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।

सड़क की लाइफ 10 से 15 साल के हिसाब से डिजाइन की जाएगी।

अधिकारी लापरवाही करेगा उसके खिलाफ मप्र सिविल सर्विसेस आचरण नियम 1966 लागू होगा।

हाईकोर्ट द्वारा 20 दिसंबर 2013 को दिए गए निर्देश