हाईवे किनारे लगे कई पेड़ काटे
भास्कर संवाददाता। टीकमगढ़
राजशाही दौर में राहगीरों की सुविधा के लिए लगाए गए हजारों पेड़ अब षडयंत्र के तहत काटे जा रहे हैं। हरे पेड़ों की जड़ों में पहले कुल्हाड़ी से घाव कर सुखाया जा रहा है। फिर पेड़ सूखने पर अधिकारियों की मिलीभगत से उन्हें काटकर बेचा जा रहा है। पिछले पांच सालों के दौरान हजारों की संख्या में हरे पेड़ों को काटा जा चुका है। लेकिन कोई भी विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। सब एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। वहीं पांच सालों में एक भी नया पेड़ सड़क किनारे नहीं लगाया गया है।
हरियाली महोत्सव के नाम पर हर साल लाखों रुपए खर्च कर सड़क किनारे पौधे रोपे जा रहे हैं। लेकिन पौधों की देखरेख ठीक तरीके से नहीं की जाती। जिससे एक-दो महीने में ही पेड़ सूखकर नष्ट हो जाते हैं। सड़कों के चौड़ीकरण और नई सड़कों के निर्माण के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार काटे गए पौधों का 10 गुना पौधरोपण किया जाना चाहिए। लेकिन सड़क निर्माण के बाद किसी भी ठेकेदार ने इस नियम का पालन नहीं किया है। संबंधित विभागों के अधिकारी भी इस मामले में घोर लापरवाही दिखा रहे हैं। लगातार कट रहे पेड़ों से एक ओर पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है। वहीं गर्मी के मौसम में लोगों को छाया तक नसीब नहीं हो रही है। टीकमगढ़ से झांसी, सागर, ललितपुर, छतरपुर हाइवे सड़कों पर अब तक करीब 5 हजार से ज्यादा हरे पेड़ों को काटा जा चुका है। अब शेष बचे पेड़ों पर को भी लगातार कुल्हाड़ी से काटकर सुखाया जा रहा है।
इन सड़कों के निर्माण में काटे पेड़
करीब दो साल पहले टीकमगढ़ से खिरिया तक बीओटी के तहत सड़क का निर्माण किया गया। इसके निर्माण में सड़क किनारे लगे सालों पुराने 700 हरे दरख्तों को काटा गया। 6 माह पहले सड़क बनकर तैयार हो गई। लेकिन ठेकेदार ने एक भी नया पौधरोपण नहीं किया। जबकि अनुबंध के तहत इन्हें 7 हजार पौधे लगाना थे। पांच साल पहले टीकमगढ़ से झांसी, सागर और छतरपुर हाइवे सड़कों का निर्माण किया गया। इसमें भी हजारों पेड़ काटे गए। लेकिन आज तक एक भी नया पौधा नहीं लगाया गया। हाल ही में टीकमगढ़ नगर में डिवाइडर सड़क निर्माण के लिए करीब 500 हरे पेड़ों को काटा गया है।
टीकमगढ़। टीकमगढ़ में हरियाली महोत्सव का बुरा हाल है।
बेनतीजा रहा हरियाली महोत्सव
टीकमगढ़। झांसी रोड पर लगे पेड़ों की चोरी छिपे कटाई की जा रही है।
टीकमगढ़। झांसी-टीकमगढ़ मार्ग पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है।
वर्ष 2008 से जिले में हरियाली महोत्सव के तहत सड़कों के किनारे पौधे लगाने का अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन न तो हाइवे सड़कों के किनारे एक भी पेड़ लगाया जा सका। न ही ग्राम पंचायतों की सड़कों के दोनों ओर पेड़ सुरक्षित रह सके। हर साल पौधे लगाने की तकनीकि में बदलाव किया जा रहा है। लेकिन पौधे सुरक्षित रखने में आज तक सफलता नहीं मिली है। जिले में दो साल पहले तकनीकि में सुधार कर बड़े गड्ढे खोदकर पौधे रोपे गए। लेकिन वर्तमान में गड्ढों में सिर्फ घासफूस नजर आ रहा है। एक भी जगह पौधे जीवित नहीं रह सके हैं। वहीं सालों पहले लगाए गए दरख्तों की कटाई बदस्तूर जारी है।
पेड़ की सुरक्षा किसके हाथ
सड़क किनारे लगे पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसका है। इसे लेकर सभी विभाग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वन विभाग के एसडीओ जेपी रावत ने बताया कि सड़क किनारे लगे पेड़ों की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग की है। वन विभाग का काम सिर्फ वन एरिया में लगे पेड़ों की सुरक्षा करना है। पीडब्ल्यूडी विभाग के ईई किशन वर्मा का कहना है कि नगरीय सीमा के पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। इसके बाहर वन विभाग का सुपरविजन करता है। पीडब्यूडी विभाग का इससे कोई लेनादेना नहीं है। वहीं नगर पालिका सीएमओ हरिहर गंधर्व का कहना है कि सड़क एमपीआरडीसी की है। इसलिए पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा एमपीआरडीसी का है। कुल मिलाकर कोई भी विभाग पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी करने को तैयार नहीं है। ऐसे में पेड़ों की कटाई बदस्तूर जारी है।
हरियाली महोत्सव के नाम पर हर साल लाखों खर्च फिर भी राहगीरों को नहीं मिलती छांव