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२० प्रतिशत युवाओं को नहीं पता ट्रैफिक के नियम
भास्कर संवाददाता - दमोह
जिले के २० प्रतिशत युवाओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी नहीं है। आरटीओ कार्यालय के अनुसार वर्ष २०१३ में जनवरी से दिसंबर के बीच लगभग ५२१२ आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाए गए हैं। वहीं २० फीसदी आवेदक ऐसे रहे जो टेस्ट में फेल हो गए। गौरतलब हो कि लर्निंग लाइसेंस टेस्ट में पास होने पर ही आवेदक को एक माह बाद स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस के लिए वाहन चलाकर दिखाना पड़ता है। जिसके बाद उसे लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। लर्निंग लाइसेंस पाने के लिए आवेदक को टेस्ट देना पड़ता है। इसमें ट्रैफिक नियमों और संकेतों से जुड़े दस सवाल पूछे जाते हैं। यह सभी सवाल पीसी टेबलेट की टच स्क्रीन को छूकर देना पड़ता है। हर सवाल के साथ तीन जवाब होते हैं, जिनमें से एक सही उत्तर बताना पड़ता है। दस में से छह सवाल का जवाब देने पर आवेदक को पास माना जाता है। आरटीओ में पदस्थ लिपिक अशोक चौहान ने बताया कि वर्ष २०१३ में कुल ५२१२ आवेदकों के लर्निंग लाइसेंस बनाए गए हैं। इसके अलावा २० प्रतिशत आवदेक ऐसे आए जो टेस्ट में फेल हो गए।
नई प्रणाली बनी मुसीबत
नई व्यवस्था के तहत आरटीआई में टेबलेट पीसी के माध्यम से टेस्ट लिए जा रहे है, लेकिन यह व्यवस्था टेस्ट लेने वाले कर्मचारियों व आवेदकों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। सबसे बड़ी परेशानी टेस्ट प्रक्रिया में समय अधिक लगना एवं टेबलेट की टच स्क्रीन के छोटे-छोटे बटन हैं। जिनके कारण स्क्रीन पर उंगली को थोड़ा सा गलत रख देने पर पूरी प्रक्रिया निरस्त हो जाती है और एक बार फिर से शुरुआती दौर से टेस्ट लेना पड़ता है। मंगलवार को टेस्ट लेने के दौरान एक आवेदक शुभम को दो से तीन बार टेस्ट देना पड़ा। जिससे एक आवेदक को टेस्ट के लिए कम से कम आधे घंटे से ज्यादा का समय लगा। वहीं एक अन्य टेस्ट देने वाले आवेदक ब्रजेश कोरी ने बताया कि उन्हें पीसी टेबलेट में ट्रैफिक चिन्ह काफी छोटे हैं एवं सवाल का जवाब देने भी समय काफी कम है। जिससे टेस्ट देने में परेशानी होती है।
१५ से २० फीसदी हो जाते हैं फेल
॥ हर साल में जितने भी आवेदक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आते हैं उनमें १५ से २० फीसदी लोग टेस्ट में फेल हो जाते हैं। अधिकांश आवेदक ग्रामीण क्षेत्र के होते हैं जिन्हें ट्राफिक नियमों की ज्यादा जानकारी नहीं होती है। वर्ष २०१३ में ५२१२ आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए गए हैं। टेबलेट से टेस्ट प्रक्रिया अभी नई प्रक्रिया है। धीरे-धीरे यह सरल हो जाएगी।॥ अंशलाल पंद्रे, प्रभारी आरटीओ दमोह
वर्ष २०१३ में बनाए गए लर्निंग व स्थायी लाइसेंस
माह लर्निंग स्थाई
अप्रैल ७५२ ५००
मई ७९० ८४१
जून ८४८ ६०७
जुलाई १२२ ३४३
अगस्त ७४४ ४९९
सितंबर ८४७ ६९७
अक्टूबर ९०१ ५०९
नवंबर ६७८ ४७९
दिसंबर ९१२ ७३७
कुल- ६३९४ ५२१२
नई प्रणाली बनी मुसीबत
नई व्यवस्था के तहत आरटीआई में टेबलेट पीसी के माध्यम से टेस्ट लिए जा रहे है, लेकिन यह व्यवस्था टेस्ट लेने वाले कर्मचारियों व आवेदकों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। सबसे बड़ी परेशानी टेस्ट प्रक्रिया में समय अधिक लगना एवं टेबलेट की टच स्क्रीन के छोटे-छोटे बटन हैं। जिनके कारण स्क्रीन पर उंगली को थोड़ा सा गलत रख देने पर पूरी प्रक्रिया निरस्त हो जाती है और एक बार फिर से शुरुआती दौर से टेस्ट लेना पड़ता है। मंगलवार को टेस्ट लेने के दौरान एक आवेदक शुभम को दो से तीन बार टेस्ट देना पड़ा। जिससे एक आवेदक को टेस्ट के लिए कम से कम आधे घंटे से ज्यादा का समय लगा। वहीं एक अन्य टेस्ट देने वाले आवेदक ब्रजेश कोरी ने बताया कि उन्हें पीसी टेबलेट में ट्रैफिक चिन्ह काफी छोटे हैं एवं सवाल का जवाब देने भी समय काफी कम है। जिससे टेस्ट देने में परेशानी होती है।