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108 स्वर्ण कलशों से श्रीजी का अभिषेक

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता। खुरई
मालथौन में आर्यिका प्रभावनामति माता के ससंघ सानिध्य में चल रहे विधान के समापन पर बुधवार को 108 स्वर्ण कलशों से श्रीजी का सामूहिक अभिषेक किया गया। सिद्धचक्र महामंडल विधान के मुख्य पात्रों ने महापूजा की और रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई।
आत्मविश्वास के साथ काम करें : आर्यिकाश्री प्रभावनामति माता ने कहा कि विघ्न और असंभव की बात वचनों में नहीं आना चाहिए। यह बातें आत्मविश्वास को कमजोर करती हैं। आत्मविष्वास के साथ एकाग्रचित्त होकर कार्य किए जाते हैं तो उनमें सफलता जरूर मिलती है। आर्यिका भावनामति माता ने कहा कि आस्था, श्रद्धा एवं भक्ति से किया गया अनुष्ठान सफलता की ओर जाता है। छोटे-छोटे पत्थर भी बड़े रास्तों में जिस तरह अहम भूमिका निभाते हैं उसी तरह मन से भावना भाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु महायज्ञ में शामिल होकर इसे सफल बनाता है।
कृष्ण-रुक्मिणी का विवाह प्रसंग सुनाया : देवरीकलां. गांधी वार्ड में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथाचार्य सीताराम पांडेय ने कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा श्रीकृष्ण को रोकने के लिए रूकमी ने प्रतिज्ञा की थी कि यदि मैं श्रीकृष्ण को मारकर रुक्मिणी को न लाया तो वापस नहीं आऊंगा।
श्रीकृष्ण और रूकमी के बीच युद्ध हुआ और भगवान श्रीकृष्ण ने ज्यों ही सुदर्शन चक्र निकाला तो रुक्मिणी ने दु:खी मन से श्रीकृष्ण को रोका और कहा बहन कभी भी अपने भाइ को दु:खी नहीं देख सकती है इसलिए रुक्मिणी ने रुकमी को मारने के लिए भगवान को रोका। कथा पलया परिवार के सदस्यों की स्मृति में चल रही थी। आयोजक महेंद्र पलिया थे।