आबादी १३ लाख, ट्रैफिक सिपाही महज ११
भास्कर संवाददाता। दमोह
जिले की आबादी लगभग १३ लाख के आसपास है। जबकि शहर की आबादी लगभग सवा लाख है। आबादी के अनुसार सड़कों पर दिनों दिन वाहनों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में शहर एवं जिले की ट्रैफिक व्यवस्था बनाएं रखने के लिए पर्याप्त ट्रैफिक स्टॉफ की आवश्यकता है। जिले में महज ट्रैफिक ११ सिपाही पदस्थ हैं। वर्तमान में यातायात के लिए जो अमला कार्यरत है वह आबादी के हिसाब से काफी कम है। यही कारण है कि शहर में यातायात व्यवस्था आए दिन गड़बड़ा जाती है। दमोह की सीमा स्टेट हाईवे के माध्यम से जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, सागर व कटनी से जुड़ी है। इन मार्गों पर हजारों वाहनों का आना-जाना लगा रहता है।
जिससे आए दिन हादसे भी घटित होते रहते हैं। जिले में यातायात अमले में २७ पद स्वीकृत हैं, जिनमें से अभी २२ पद ही भरे हुए हैं। इसमें सूबेदार का पद अब भी खाली है। वर्तमान में एक उपनिरीक्षक, ४ सहायक उपनिरीक्षक, ६ हेड कांस्टेबल एवं ११ आरक्षक पदस्थ हैं। इन्हीं के भरोसे शहर की यातायात व्यवस्था संचालित हैं। यातायात अमले में स्टॉफ की कमी के चलते यातायात व्यवस्था का संचालन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। जिससे आए दिन दुर्घअनाएं भी बढ़ रही हैं।
हर माह ३०० नए
वाहन सड़कों पर
परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक हर साल चार हजार से अधिक दोपहिया और चार पहिया वाहन जिले की सड़कों पर उतर रहे हैं। जिससे सड़कों पर लगातार वाहनों का लोड़ बढऩे से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है। गौरतलब हो कि परिवहन विभाग द्वारा अनफिट बसों को भी फिटनेस का प्रमाण-पत्र जारी किया जा रहा है जिससे वाहन दुर्घटनाएं बढ़ती हैं।
ट्रैफिक सिग्नल बेहद जरूरी
शहर की टैफिक व्यवस्था कंट्रोल करने के लिए यातायात अमले की भारी कमी है। जो शहर के चौराहों के हिसाब से नाकाफी हैं। यदि प्रमुख चौराहों पर सिग्नल लगा दिए जाएं तो चौराहों पर यातायात व्यवस्था ऑटोमेटिक संचालित होगी और ट्रैफिक कर्मचारियों पर दबाव भी कम हो जाएगा।
ञ्च चौराहों पर सिग्नल न होने के कारण लोग यहां-वहां से वाहन निकलते हैं। जिससे दुर्घटनाएं बढ़ती हैं।
ञ्च यातायात कर्मियों की कमी के चलते शहर में भारी वाहनों का प्रवेश रहता है।
ञ्च टै्रफिककर्मी कम होने से शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था ट्रैफिक कंट्रोल नहीं हो पाता।
ञ्च शहर के घंटाघर से बड़ापुल मार्ग, बकौली चौराहा मार्ग पर जब चाहे यातायात जाम होने से लोग परेशान रहते हैं।
हर साल बढ़ रही
वाहनों की संख्या
साल दो पहिया चार पहिया भारी वाहन
०७-०८ २९८४ ५४ १०
०८-०९ २२६९ २७ १२
०९-१० ३५१० २४ २१
१०-११ ४५९१ १५२ ७६
११-१२ ४००० १५२ १८
१२-१३ ५५०० ५२ ३०
२०१३ से अभी तक कुल- ३९८२
संख्या बढ़ाने का प्रयास है
॥ जिले में पुलिस व्यवस्था के हिसाब से बल की कमी तो है, लेकिन सीमित बल में भी बेहतर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में जल्द ही ट्रैफिक पुलिस में बल बढ़ाया जाएगा।
इतनी जरूरत है
शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक चौराहों पर दो-दो सिपाही होना चाहिए। आरआई सुदेश सिंह ने बताया कि शहर की भौगोलिक स्थिति, वाहनों की संख्या एवं आबादी के हिसाब से यातायात अमला बढ़ाए जाने की भी जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिले की ट्रैफिक व्यवस्था को देखते हुए लगभग ५० ट्रैफिक कर्मियों की आवश्यकता है। जिनमें १ निरीक्षक, दो सूबेदार, ४ उपनिरीक्षक, ८ सहायक उपनिरीाक, ८ प्रधान आरक्षक एवं ३० आरक्षकों की होना चाहिए।
क्या होती है परेशानी
हर माह ३०० नए
वाहन सड़कों पर
परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक हर साल चार हजार से अधिक दोपहिया और चार पहिया वाहन जिले की सड़कों पर उतर रहे हैं। जिससे सड़कों पर लगातार वाहनों का लोड़ बढऩे से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है। गौरतलब हो कि परिवहन विभाग द्वारा अनफिट बसों को भी फिटनेस का प्रमाण-पत्र जारी किया जा रहा है जिससे वाहन दुर्घटनाएं बढ़ती हैं।
ट्रैफिक सिग्नल बेहद जरूरी
शहर की टैफिक व्यवस्था कंट्रोल करने के लिए यातायात अमले की भारी कमी है। जो शहर के चौराहों के हिसाब से नाकाफी हैं। यदि प्रमुख चौराहों पर सिग्नल लगा दिए जाएं तो चौराहों पर यातायात व्यवस्था ऑटोमेटिक संचालित होगी और ट्रैफिक कर्मचारियों पर दबाव भी कम हो जाएगा।