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जब तक वसूली पूरी नहीं होती तब तक वेतन नहीं मिलेगा : एमडी
भास्कर संवाददाता। दमोह
विद्युत मंडल दमोह मंडल के अधिकारियों की समीक्षा बैठक गुरुवार दोपहर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में हुई। इस बैठक में जबलपुर से आई लगभग दस सदस्यीय टीम के द्वारा विभागीय अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्य अभियंता सुखवीर सिंह जबलपुर द्वारा अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए उनके कार्यों की जानकारी ली गई। विभाग के अधिकारियों को दिए गए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति नहीं होने पर उन्हें जमकर फटकार लगाते हुए तय समय में वसूली पूर्ण करने कहा गया। एमडी द्वारा समय सीमा वसूली नहीं किए जाने तक वेतन रोके जाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठक में प्रत्येक अधिकारियों का बौद्धिक स्तर जाना गया जिसमें मौजूद अधिकारियों में कुछ अधिकारी ही खरे उतर पाए। जिले के कार्यों की समीक्षा के दौरान एमडी श्री सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दमोह की बड़ी गंभीर स्थिति है यहां सब भर्रासाही चल रही है। कोई भी अपने काम के प्रति गंभीर नहीं है। आप लोगों को शर्मनाक से नीचे वाले शब्द की उपाधि मिलना चाहिए। लगभग दो तीन घंटे तक चली इस बैठक में शासन द्वारा किसानों के हित में चलाई जाने वाली योजनाओं का लाभ दिए जाने, फीडर सेपरेशन का काम जल्द पूरा कराने, बकाया वसूली करने के अलावा सभी लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दिया गया।
कंपनी और किसान दोनों को लाभ मिलना चाहिए
बैठक में दौरान अधिकारियों से शासन की योजना के तहत एससीएसटी व जनरल के किसानों को दिए जाने वाले कनेक्शनों के संबंध में चर्चा करते हुए एमडी श्री सिंह ने सभी से सवाल किए जिसमें में महज दो चार अधिकारी ही ठीक से जबाव दे पाएं मौजूद अधिकारियों को यह भी नहीं पता था कि यदि विभाग द्वारा एससीएसटी के अंतर्गत आने वाले किसानों को ३ एचपी का टीसी काटा जाता है, तो कितना पैसा किसान को देना होगा और उससे कंपनी को क्या फायदा है और किसान को क्या लाभ। सौ प्रतिशत सब्सिडी के संबंध में भी अधिकारी कुछ नहीं बता सके। सभी को बताया गया कि यदि किसानों को परमानेंट कनेक्शन दिए जाते हैं, तो उसमें किसानों को चार महीने की जगह बारह महीने बिजली मिलेगी और पैसा भी कम लगेगा और कंपनी को भी एक साथ रुपए मिलेगा इससे दोनों को फायदा होगा।
ऑपरेशन क्लीन भी नहीं हुआ पूरा
बैठक में ऑपरेशन क्लीन के तहत जानकारी मांगी जाने पर अधिकारियों के द्वारा संतोषजनक जबाव नहीं दिया गया। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों ने नाराजगी जताई। ऑपरेशन के अंतर्गत दिए गए लक्ष्य को भी पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा इस काम को करने वाले अधिकांश अधिकारियों को यह भी नहीं पता था इंक्शन क्या होता है। इसमें क्या काम करना है। दर्जनभर से ज्यादा से सवाल करने पर एक अधिकारी ने संतोषजनक जवाब दिया। यहां तक की कई अधिकारी यूनिट भी ठीक से नहीं निकाल पाए।
फीडर सेपरेशन को जल्द पूरा कराया जाए : लगभग दो साल से जिले में चल रहे फीडर सेपरेशन के काम को पूरा नहीं होने पर उसमें आने वाली बाधाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए काम को फरवरी के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। टीम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि दो रबी के सीजन निकल गए हैं, फिर भी काम पूरा नहीं हो पाया है। इस सीजन में काम पूर्णं होना चाहिए। बैठक में जिले सहित अन्य जिलों के भी अधिकारी मौजूद रहे।
ऑपरेशन क्लीन भी नहीं हुआ पूरा
बैठक में ऑपरेशन क्लीन के तहत जानकारी मांगी जाने पर अधिकारियों के द्वारा संतोषजनक जबाव नहीं दिया गया। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों ने नाराजगी जताई। ऑपरेशन के अंतर्गत दिए गए लक्ष्य को भी पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा इस काम को करने वाले अधिकांश अधिकारियों को यह भी नहीं पता था इंक्शन क्या होता है। इसमें क्या काम करना है। दर्जनभर से ज्यादा से सवाल करने पर एक अधिकारी ने संतोषजनक जवाब दिया। यहां तक की कई अधिकारी यूनिट भी ठीक से नहीं निकाल पाए।
फीडर सेपरेशन को जल्द पूरा कराया जाए : लगभग दो साल से जिले में चल रहे फीडर सेपरेशन के काम को पूरा नहीं होने पर उसमें आने वाली बाधाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए काम को फरवरी के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। टीम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि दो रबी के सीजन निकल गए हैं, फिर भी काम पूरा नहीं हो पाया है। इस सीजन में काम पूर्णं होना चाहिए। बैठक में जिले सहित अन्य जिलों के भी अधिकारी मौजूद रहे।
कंपनी और किसान दोनों को लाभ मिलना चाहिए
बैठक में दौरान अधिकारियों से शासन की योजना के तहत एससीएसटी व जनरल के किसानों को दिए जाने वाले कनेक्शनों के संबंध में चर्चा करते हुए एमडी श्री सिंह ने सभी से सवाल किए जिसमें में महज दो चार अधिकारी ही ठीक से जबाव दे पाएं मौजूद अधिकारियों को यह भी नहीं पता था कि यदि विभाग द्वारा एससीएसटी के अंतर्गत आने वाले किसानों को ३ एचपी का टीसी काटा जाता है, तो कितना पैसा किसान को देना होगा और उससे कंपनी को क्या फायदा है और किसान को क्या लाभ। सौ प्रतिशत सब्सिडी के संबंध में भी अधिकारी कुछ नहीं बता सके। सभी को बताया गया कि यदि किसानों को परमानेंट कनेक्शन दिए जाते हैं, तो उसमें किसानों को चार महीने की जगह बारह महीने बिजली मिलेगी और पैसा भी कम लगेगा और कंपनी को भी एक साथ रुपए मिलेगा इससे दोनों को फायदा होगा।