मोबाइल पर नजर आएंगे टीकमगढ़ के नजारे
संजय मौर्य - टीकमगढ़
प्रदेश का टीकमगढ़ एक मात्र ऐसा जिला बन गया है, जिसकी निगरानी आईपी कैमरा .इंटरनेट प्रोटोकॉल. और आरएफ .रेडियो फिक्वेसी. के जरिए की जा रही है। ऐसा होने से शहर के मुख्य स्थल अब पुलिस अधिकारियों मोबाइल में कैद हो गए हैं। वे छुट्टी पर रहें या फिर प्रदेश से बाहर, बस एक क्लिक करने पर उन्हें शहर के मुख्य प्वाइंट मोबाइल की स्क्रीन पर नजर आएंगे। पुलिस की ओर से यह अनूठी पहल महिलाओं से छेड़छाड़, हत्या और चोरियां पर अंकुश लगाने के लिए की गई है। इस तरकीब से काफी हद तक पुलिस को राहत मिलेगी।
अपराधों की रोकथाम करने के लिए टीकमगढ़ शहर के छह मुख्य स्थलों की अब कैमरों के जरिए २४ घंटे निगरानी की जा रही है। पुलिस ने इसके लिए १८ कैमरे लगवाए हैं। इन कैमरों को आईपी और आरएफ टेक्नालॉजी से जोड़ा गया है। यहां पर आप को बता दें कि आमतौर पर बड़े शहरों में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, जिन्हें जोडऩे के लिए केबलिंग की जाती है, मगर आईपी कैमरे में ऐसा नहीं होता है, यह वायर लैस कैमरे होते हैं। जिन्हें आईपी एंड्रेस से जोड़ा जाता है। टीकमगढ़ शहर में पहली बार ये कैमरे लगे हैं। इन्हें फिक्वेसी के जरिए कनेक्ट किया जाता है। एक विशेष कोड नंबर डालकर अधिकारी कैमरे से किसी भी प्वाइंट को मोबाइल पर देख सकते हंै।
एसपी अमित सिंह ने बताया कि यह सुविधा प्रारंभ होने से शहर के मुख्य स्थानों की रात-दिन निगरानी हो रही है। २४ घंटे की रिकार्डिंग की जा रही है। यदि कहीं पर कोई वारदात होती है तो उसे रिकार्डिंग के जरिए देख लिया जाता है। टीकमगढ़ में यह सुविधा दो दिन पहले ही शुरु हुई है। प्रयोग के तौर पर अधिकारियों ने इन कैमरों को अपने मोबाइल से कनेक्ट कर लिया है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में शहर के ६ प्वाइंट चिंहित किए गए हैं, अगले चरण में बस स्टैंड सहित अन्य मुख्य प्वाइंटों को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। ऐसे होने से शहर की हर गतिविधियां कैमरे में कैद हो जाएंगे। अपराधी को पकडऩे और पहचानने में भी परेशानी नहीं होगी। शासन की ओर से यह पहल सिटी सर्वलांस की जरिए की गई है। ऐसा होने से काफी हद तक अपराधों पर अंकुश लगेगा।
टीकमगढ़। मोबाइल से कैमरे की लोकेशन तलाशते एसपी अमित सिंह।
इन स्थानों की हो रही निगरानी
पुलिस के मुताबिक शहर का जवाहर चौक, पपौरा चौराहा, एसबीआई बैंक चौराहा, गांधी चौराहा, अस्पताल चौराहा, मानस मंच और कोतवाली तिराहा पर कैमरे लगाए हैं। इन चौराहों की निगरानी अब अधिकारी कभी कर सकते हैं। गुरुवार को इनकी टेस्टिंग एसपी अमित सिंह स्वयं सड़कों पर चलकर अपने मोबाइल से की।
यह है आईपी और आरएफ
प्रोजेक्ट मैनेजर नवीन खरे ने बताया कि आम तौर पर सीसीटीवी कैमरे का बड़े शहरों में उपयोग किया जाता है। मगर आईपी और आरएफ एक अलग किस्म की टेक्नालॉजी है। आईपी इंटरनेट के जरिए जुड़ा होता है, यह एक विशेष कोड नंबर होता है, जिसे मोबाइल में डालकर कैमरे से कनेक्ट किया जाता है और कैमरे से जुडऩे के बाद लाइव दिखाई देने लगता है। श्री खरे ने बताया कि आरएफ सुविधा होने से कैमरे को केबिल के जरिए जोडऩे की जरुऱत नहीं होती है, रेडियो फिक्वैसी के जरिए कोड नंबर डालकर कैमरे को सर्च किया जाता है और कनेक्वेटी मिल जाती है। अलग से किसी तरह की नेटवर्किंग की जरुरत नहीं होती है।
- शहर के मुख्य स्थानों पर लगवाए गए कैमरे, अधिकारियों के मोबाइल से कनेक्ट हैं कैमरे