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वन्यप्राणियों की गणना पूरी, आंकड़े नहीं आए
-जानकारी देने से बच रहे अधिकारी , वर्ष 2008-09 में अंतिम बार हुई थी वन्यप्राणियों की गिनती
भास्कर संवाददाता - टीकमगढ़
पांच साल के लंबे अंतराल के बाद जिले के वन क्षेत्र में वन्यप्राणियों की गणना की गई। मगर अधिकारी अभी तक आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। बताया जाता है कि २० से 26 जनवरी एक सप्ताह तक मांसाहारी और शाकाहारी वन्यप्राणियों की गिनती हुई। लेकिन इसकी जानकारी जिला मुख्यालय नहीं पहुचाई गई है। जिले भर की जानकारी एकत्रित करने का बहाना बनाकर वन विभाग के अधिकारी अपना बचाव कर रहे हैं। जबकि विभाग के कई कर्मचारियों का कहना है कि वन्यप्राणियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। इसलिए अधिकारी जानकारी देने से कतरा रहे हैं।
पांच साल पहले हुई गणना में जितने वन्यप्राणी दर्ज किए गए थे। उस संख्या में गिरावट हुई है। वन क्षेत्र में लगातार हो रही अवैध कटाई और वन्यप्राणियों के शिकार से यह स्थिति निर्मित हुई है। वन्यजीवों की लगातार घटती संख्या से विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं। लेकिन वनों की कटाई और वन्यप्राणियों के शिकार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ओरछा रेंज के परिक्षेत्र अधिकारी राजकुमार शिवहरे ने बताया कि एक सप्ताह तक वन क्षेत्रों में वन्यप्राणियों की गिनती की गई है। लेकिन अभी जिले भर के आंकड़ों का संकलन नहीं हुआ है। संकलन के बाद जानकारी कान्हा नेशनल पार्क में दर्ज की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी सार्वजनिक करने से मना किया है। ऐसे में वन्यप्राणियों की गणना को गोपनीय रखा गया है। वहीं डीएफओ एमसी सिंघल का कहना है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है। यह ही यह आंकड़ा सामने आएगा कि जानवरी बड़ें हैं कि घटे।
टीकमगढ़। ओरछा के ऐतिहासिक स्मारकों में बैठे गिद्ध।
यह है मामला
दरअसल 20 से 26 जनवरी तक जिले की 5 रेंज के 80 बीटों के कर्मचारियों को वन्यप्राणियों की गणना का जिम्मा सौंपा गया था। एक सप्ताह में कर्मचारियों को जंगल क्षेत्र के शाकाहारी, मांसाहारी वन्य प्राणियों की गणना करना थी। साथ ही जंगल में मौजूद जड़ी बूटियों, खर पतवार, पेड़ पौधे, वनस्पति के प्रतिशत का पता लगाना था। इसके अलावा जंगल के जैविक दबाव क्षेत्र और वन आवरण क्षेत्र के आंकड़े जुटाना थे। इन आंकड़ों का पांच साल पहले की गई गणना के आंकड़ों से मिलान करना है। जिससे पता चल सके कि वन क्षेत्र में वन्यप्राणी सुरक्षित हैं और उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। गणना के बाद रिपोर्ट कान्हा नेशनल पार्क भेजी जाना है। वन्यप्राणियों की गिनती का काम भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के निर्देश में किया जाना था। गणना पूरी होने पर इसे कान्हा नेशनल पार्क में कंप्यूटराईज्ड किया जाना है। लेकिन गणना के शुरुआती दौर के बाद ही वन विभाग के अधिकारी इसे गोपनीय काम बताकर जानकारी देने से बच रहे हैं।