माता ही बालक की प्रथम गुरू है: कुसुम
दमोह. सरस्वती शिशु मंदिर शिशु विभाग में मातृ-सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि साक्षी वैशंपायन एवं आरती चौरसिया, कुसुम खरे, कृष्णा सेंगर मौजूद रहीं। इस अवसर पर कुसुम खरे ने कहा कि मातृ सम्मेलन अखिल भारती विद्याथारी की रीढ़ है। माता बालक की प्रथम गुरू होती है। बच्चे के संस्कार माता के गर्भ से ही प्रारंभ हो जाते हैं। वीर शिवाजी को अपनी माता से ही संस्कार प्राप्त हुए। शिशु वाटिका प्रमुख मुन्नी असाटी ने कहा कि शिशु शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है।