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तीन साल में नहीं बन सकी तकनीकी प्रयोगशाला

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - इटारसी
शहर को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में पॉलिटेक्निक कॉलेज की सौगात मिले तीन साल बीत गए लेकिन कॉलेज के स्टूडेंट्स को न तो शासन के अनुभवी शिक्षकों की क्लास में पढऩे का अवसर मिला और न ही उपकरणों से व्यवस्थित प्रयोगशाला में इलेक्ट्रानिक और मैकेनिकल विषयों के प्रयोगों को समझने का। कॉलेज में रेगुलर स्टाफ के नाम पर एक मात्र प्राचार्य की नियुक्ति हुई है। शेष 91 पद खाली पड़े हैं। छह कक्षाओं के लिए एक लैब टेक्नीशियन, 2 क्लर्क और 2 चतुर्थश्रेणी कर्मचारी अस्थायी रूप से अन्य कॉलेजों से यहां अटैच किए गए हैं। अस्थायी 15 अतिथि विद्वानों के भरोसे कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई चल रही है। किराए के भवन में चल रहे कॉलेज में 7 कक्षों में 6 कक्षाएं लगाना प्रबंधन की मजबूरी है। इन्हीं कमरों में नाम के लिए कंप्यूटर कक्ष, लाइब्रेरी भी संचालित की जा रही है। छात्र कवि सिंह, अभिषेक शर्मा ने बताया कि प्रयोगशाला में न तो पर्याप्त उपकरण हैं और न पुस्तकालय में स्टूडेंट्स की संख्या के अनुसार पुस्तकें। प्राचार्य आरएस लौवंशी ने बताया कि खरीदी के बिल भुगतान में लेटलतीफी और अनुभवी शिक्षकों की कमी के कारण प्रयोगशाला को व्यवस्थित करने उपकरणों की खरीदी करना मुश्किल हो रहा है। बिना व्यवस्थाओं के इंजीनियर बनने का सपना लिए कॉलेज में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को परेशान होना पड़ रहा है।




इटारसी। पॉलीटेकनिक कॉलेज।

यह भी है समस्या

> वर्तमान सत्र में कॉलेज में व्यवस्थाओं के लिए 25 लाख की खरीदी की गई। खरीदी का भुगतान के डिपॉजिट फंड से आबंटन के बाद किया जाता है लेकिन 6 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं होने के कारण विक्रेता कानूनी नोटिस भेज रहे हैं। ऐसे में खरीदी करके प्रयोगशाला व्यवस्थित करना मुश्किल हो रहा है।

> कॉलेज में मैकेनिकल और इलेक्ट्रानिक्स ब्रांच के अनुभवी शिक्षक नहीं होने के कारण अध्ययन, अध्यापन और प्रायोगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

> कॉलेज में 92 में से 91 पद रिक्त हैं। अनुभवी शिक्षक नहीं आने के कारण स्टूडेंट्स की पढ़ाई अतिथियों के भरोसे चल रही है।



अनुभवी शिक्षक नहीं है

किराए के भवन में कॉलेज संचालित किया जा रहा है। कॉलेज में स्टूडेंट्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में कक्षाएं संचालित करने और प्रयोगशाला बनाने के लिए जगह की कमी है। अनुभवी शिक्षक नहीं होने के कारण प्रयोगशाला स्थापित करना मुश्किल है।

आरएस लौवंशी, प्राचार्य पॉलिटेक्निक कॉलेज।

तीन साल में सिर्फ कॉलम ही बन सके

सब मिशन ऑन पॉलिटेकनिक अंडल ऑर्डिनेटेड एक शन फॉर स्किल डवलपमेंट योजना के तहत 2010 में शहर को पॉलिटेक्निक कॉलेज की सौगात मिली थी। योजना के अनुसार कॉलेजों के संचालन के लिए 8 करोड़ रुपए भवन निर्माण और 4 करोड़ रुपए उपकरण, फर्नीचर और पुस्तकों के लिए स्वीकृत किए गए थे। सनखेड़ा नाका के पास साढ़े सात एकड़ के भूखंड पर भवन निर्माण के लिए निर्माण एजेंसी को 1 करोड़ का भुगतान भी किया जा चुका था। इसके बाद भी तीन साल में जमीन पर केवल कॉलम ही खड़े किए जा सके हैं।



न तो पर्याप्त उपरकरण है और न ही पुस्कालय में पर्याप्त पुस्तकें साथ ही ९१ पद खाली पड़े है