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स्त्री-पुरुष जीवन की गाड़ी के दो पहिए

8 वर्ष पहले
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भिंड. स्त्री और पुरुष जीवन की गाड़ी के दो पहिया हैं। बिना इनके जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह संसार इन्हीं दो पहियों की वजह से चलता है। इसलिए लोगों को बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं समझना चाहिए। यह बात जैन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य यूके कोठारी ने गुरुवार को एनएसएस के शिविर में कन्या भ्रूण हत्या पर आयोजित बौद्धिक में कहीं।
उन्होंने कहा कि कन्या को दो घरों का दीपक कहा जाता है। क्योंकि यह दो कुल का नाम रोशन करती है। इसके बिना तो जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। इसलिए कन्याओं को भी बेटों की तरह शिक्षा और परवरिश मिलनी चाहिए। जिससे वे भी अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकें। इसीक्रम में कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. मनोज जैन ने कहा कि कन्याओं से घर रोशन होता है। जिसके घर में कन्या न हो तो उसका घर सूना रहता है। आजकल तो बेटियां हर क्षेत्र में बेटों को टक्कर दे रही हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, कलेक्टर, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तक कन्याएं बनी हैं और बन रही हैं। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या को महापाप बताते हुए कहा कि ऐसा करने वालों को ईश्वर कभी माफ नहीं करता है। इस अवसर पर निधि मिश्रा, माधुरी नरवरिया, नेहा भदौरिया आदि उपस्थित रहे।