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आबादी १८ लाख, एंबुलेंस सिर्फ १२

7 वर्ष पहले
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६० हजार की आबादी पर एक एंबुलेंस का प्रावधान, इस हिसाब से ३० गाडिय़ां होनी चाहिए भिंड में।
भास्कर संवाददाता - भिंड
भिंड जिले में आबादी के हिसाब से पर्याप्त एंबुलेंस नहीं हैं। अभी सिर्फ १२ गाडिय़ों से काम किया जा रहा है। इस कारण कई पीडि़त समय रहते अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे, जबकि ६० हजार की आबादी पर एक एंबुलेंस होने का प्रावधान है। इस हिसाब से भिंड जिले में ३० गाडिय़ां होनी चाहिए। इधर १०८ सेवा के अधिकारियों का कहना है कि भिंड के ग्रामीण इलाकों से उतने च्यादा केस नहीं निकलते। इसलिए यहां अधिक गाडिय़ों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
मंगलवार को भी १०८ एंबुलेंस की कमी खल गई। मानपुरा गांव के पास लग्जरी गाड़ी और बाइक की भिड़ंत में दो लोगों की मौके पर मौत हुई थी। बालक योगेश घायल हुआ। उसे गंभीर घायल हालत में प्राथामिक उपचार के बाद जिला अस्पताल से ग्वालियर रैफर किया जाना था, लेकिन एंबुलेंस दूसरी जगह गई थी। यह डेढ़ घंटे बाद लौटकर आई। ऐसे में समय पर इलाज न मिल पाने के कारण योगेश ने भी दम तोड़ दिया। सिर्फ योगेश ही नहीं, बल्कि आए दिन किसी न किसी मरीज को १०८ एंबुलेंस की कमी का सामना करना पड़ रहा है।




- २८ जनवरी को मनोहरपुरा निवासी गुड्डी पत्नी राम सिंह कुशवाह की डिलीवरी होनी थी। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन गाड़ी नहीं पहुंची। वे मजबूरन जीप से गए। रास्ते में बच्चा हुआ, इसके बाद गुड्डी अस्पताल न जाते हुए बीच से ही घर लौट आई।

- २२ जनवरी को एंडौरी निवासी ज्योति पत्नी बालकिशन जाटव को प्रसव वेदना हुई। एंबुलेंस को फोन लगाया गया। काफी देर इंतजार के बाद भी गाड़ी नहीं पहुंची। नतीजा महिला को घर पर ही प्रसव हुआ।

- कुछ दिन पहले एहनो निवासी मान सिंह बाइक पर सवार होकर ग्वालियर से आ रहे थे। नेशनल हाईवे-९२ पर तेहरा गांव के पास उनका एक्सीडेंट हुआ। इसके बाद राहगीरों ने १०८ एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन किया। गाड़ी के न पहुंचने पर वे निजी वाहन से अस्पताल पहुंचे।

इनको खली एंबुलेंस की कमी



घायलों के साथ-साथ प्रसूताओं को भी ले जाती है एंबुलेंस भिंड जिले में १०८ सेवा के तहत अभी सिर्फ १२ एंबुलेंस हैं, जिनमें से कुछ जिला मुख्यालय और बाकी गाडिय़ां दूसरे कस्बाई इलाकों में रहती हैं। इन गाडिय़ों से सिर्फ घायल व बीमार लोगों को ही अस्पताल नहीं पहुंचाया जा रहा, बल्कि प्रसूताओं को डिलीवरी के लिए ले जाने की जिम्मेदारी भी १०८ एंबुलेंस की ही है। ऐसे में जाहिर सी बात है कि कमी खल रही है।

ज्यादा केस नहीं

॥नियमानुसार ६० हजार की आबादी पर एक एंबुलेंस होनी चाहिए, लेकिन भिंड जिले के ग्रामीण इलाकों से उतने ज्यादा केस नहीं निकलते। इसलिए यहां कमी नहीं खल रही है। हालांकि हमने एक नई एंबुलेंस का प्रपोजल भेजा है।

कल्यान कुमार कोटाल, प्रोग्राम मैनेजर १०८ एंबुलेंस सेवा ग्वालियर

यह है परेशानी

- एक साथ दो या उससे अधिक जगह से फोन आने पर गाड़ी नहीं पहुंच पाती है।

- एंबुलेंस दूसरे स्थान पर होने से मरीज के पास तक पहुंचने में समय लग जाता है।

- गाडिय़ों की कमी के कारण कई लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है।

यह है नियम

१०८ सेवा को भोपाल स्थित कंट्रोल रूम से संचालित किया जाता है। इस स्कीम के तहत हर ६० हजार की आबादी पर एक एंबुलेंस होना आवश्यक है। भिंड जिले की आबादी लगभग १८ लाख है। ऐसे में नियमानुसार यहां ३० गाडिय़ां होनी चाहिए।



सिटी कोतवाली के सामने खड़ी एंबूलेंस।



अधिकारी बोले- भिंड के ग्रामीण इलाकों से नहीं निकलते ज्यादा केस