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- ‘कानूनी ज्ञान कम होने से पुलिस नहीं कर पाती मदद’
‘कानूनी ज्ञान कम होने से पुलिस नहीं कर पाती मदद’
कमजोर वर्ग के प्रति पुलिस संवेदनशील बने, विषय पर हुई कार्यशाला ।
भास्कर संवाददाता - शिवपुरी
सुप्रीम कोर्ट में किसी भी केस की बहस में सारा रिकार्ड एक तरफ तथा एफआईआर अकेली दूसरी तरफ होती है। वो एफआईआर दर्ज करने वाला पुलिस थाने का हवलदार 8वीं या 12वीं पास है। जबकि उसके द्वारा लिखी गई एफआईआर पर बहस करने वाले लॉ के टॉपर व पीएचडी वाले लोग रहते हैं। कानून की कम जानकारी होने से ही पुलिस कमजोर वर्ग की मदद नहीं कर पाती। यह बात सोमवार को पुलिस कंट्रोल रूम में, कमजोर वर्ग के प्रति पुलिस संवेदनशील बने, विषय पर महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यशाला में एडीशनल एसपी आलोक कुमार ने कही। इस मौके पर सरकारी वकील वीरेंद्र शर्मा सहित एसडीओपी शिवपुरी एसकेएस तोमर, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी आराधना डेविस व पुलिस थानों के एचसीएम ((एफआईआर लिखने वाले हवलदार)) मौजूद रहे।
एएसपी आलोक कुमार ने कहा कि पीडि़त की मदद के लिए आपकी भावना अच्छी होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि कानून की पूरी जानकारी होना चाहिए। इसके लिए समय-समय पर होने वाले कानूनी बदलाव व नियमों को समाचार पत्रों में पढऩा चाहिए। क्योंकि जब तक यह जानकारी नहीं होगी कि हम किस मामले में कौन सी धारा के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर सकते हैं और एफआईआर के लिए क्या तथ्य महत्वपूर्ण हैं, जिनका उसमें उल्लेख करना चाहिए, तब तक हम मदद नहीं कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि महिलाओं के साथ हुई आगजनी जैसी घटना में अब जरूरी नहीं है कि राजपत्रित अधिकारी के सामने ही उसके बयान लिए जाएं, अब पुलिस अधिकारी भी इसके लिए सक्षम हैं।
पुलिस कंट्रोल रूम में कार्यशाला में उपस्थित अधिकारी।