‘कारागार नहीं सुधारगृह है जेल’
शिवपुरी - आज के समय में कोई भी जेल- सही मायनों में जेल नहीं है। क्योंकि जेल तो अंग्रेजों के समय में होती थी जहां कैदियों को तरह-तरह की प्रकार की प्रताडऩाएं दी जाकर उन्हें उनके अपराधों की सजा दी जाती थी। लेकिन आज कोई भी कारागार जेल नहीं बल्कि सुधारगृह है, जहां आने वाले कैदियों को उनके जीवन में बदलाव के लिए प्रेरित किया जाकर ज्ञान, संस्कार और अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। यह बात रविवार को जैनमुनि निर्भय सागर महाराज ने जिला जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जीवन बदलने के संबंधी में प्रवचन देते हुए कही। जैनमुनि ने कहा कि अपने किए अपराध पर पश्चाताप का इससे बढ़कर कोई अन्य कोई स्थान नहीं। इसलिए यहां आने वाले लोगों को अपने क्रोध पर संयम पाते हुए जीवन में बदलाव का यह मार्ग अपनाना चाहिए। प्रवचनों के दौरान मुनिश्री ने जेल में बंद कैदियों से उनके अपराधों से दूर रहने के तीन संकल्प भी लिए। जिसमें उन्होंने जीवन में मांस का सेवन नहीं करने, नशे से दूर रहने और पराई स्त्री पर बुरी नजर ना डालना का संकल्प लिया। इस मौके पर कलेक्टर आरके जैन, एसपी डॉ.महेन्द्र सिंह सिकरवार, एसडीएम डीके जैन, जिला जेल उप अधीक्षक व्हीएस मौर्य सहित बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी तथा कैदी मौजूद थे।