आधी रात रोया नवजात, बच गई जान
सर्द रात में शॉल में लिपटे शिशु को बचाने वाले दंपति ने ही मांगा बच्चा।
भास्कर संवाददाता - शिवपुरी
सोमवार-मंगलवार की सर्द रात में शॉल में लिपटे नवजात शिशु के रोने की आवाज पास ही रहने वाले एक दंपति ने सुनी तो उस मासूम की जान बच गई। पुलिस के कहने पर दंपति ने रात भर बच्चे को अपने घर में रखा तथा सुबह बच्चे को लेकर जिला अस्पताल की एसएनसीयू में आ गए। जहां डॉक्टर ने जांच में पाया कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। बच्चे की जान बचाने वाले दंपति उसे अपना बेटा बनाने को आतुर हैं। जिस शॉल में बच्चा लिपटा मिला, वो काफी महंगी व अच्छी है, जिसे देखकर लगता है कि बच्चे की मां अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती है।
ऐसे सुनी बच्चे की आवाज: खोड के मजरा हिम्मतपुर में रहने वाले छोटेलाल जाटव को सोमवार-मंगलवार की रात 1.30 बजे घर के बाहर किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। सर्द रात में छोटेलाल जब घर से बाहर निकला तो उसने देखा कि अंधेरे में सड़क किनारे पड़े एक कपड़े की तरफ से बच्चे की आवाज आ रही है। उसने देखा कि अच्छी महंगी शॉल में उघड़ा पड़ा बच्चा ठंड के मारे रो रहा है। उसने बच्चे को उठाने के बजाय उसे शॉल से ढंक दिया और तत्काल खोड थाने पहुंचा। इस बीच वो अपनी पत्नी गंगो बाई को बच्चे की हिफाजत के लिए वहां छोड़ गया। पुलिस ने मौके पर जाकर बच्चे को उठाया और फिर छोटेलाल से कहा कि तुम रात में इसकी देखभाल करो, सुबह जिला अस्पताल ले जाएंगे। खोड थाना पुलिस ने धारा 317 के तहत प्रकरण दर्ज कर बच्चे को जिला अस्पताल भेज दिया।
भूखा था नवजात: छोटेलाल की पत्नी गंगो बाई ने बताया कि बच्चे को न केवल ठंड लग रही थी, बल्कि वो भूखा भी था। हमने रात में ही बकरी का दूध निकालकर उसे पिलाया। दूध पीने के बाद वो मेरी गोद में सो गया। रात भर में उस बच्चे से इतना प्रेम हो गया कि सुबह कब हो गई, पता ही नहीं चला। छोटेलाल व गंगो बाई का कहना है कि हमारी दो बेटियां हैं, बेटा कोई नहीं। हम चाहते हैं कि जिस बच्चे की जान हमने बचाई, वो बच्चा हमें मिल जाए।
हिम्मतपुर गांव में सड़क किनारे मिला नवजात शिशु