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कुपोषण मिटाने के लिए आए बजट को खर्च नहीं कर पाए अधिकारी
अधिकारियों ने बरती लापरवाही
भास्कर संवाददाता - शिवपुरी
पोहरी में बढ़ते कुपोषण को थामने के लिए पिछले साल ((2013-1४)) में अटल बाल आरोग्य मिशन के तहत दिया गया 33 लाख का बजट प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण खर्च नहीं हो पाया। कुपोषण मिटाने के लिए कोई योजना भी चालू नहीं हो सकी। एक साल से यह बजट विभागीय अधिकारियों के पास है। इस बजट की कार्ययोजना तो बनाई जा रही है मगर खर्च नहीं किया जा रहा। अब अगर दो महीने में विभागीय अधिकारी बजट खर्च नहीं कर पाए तो वर्ष 2014-15 के लिए इस बजट को खर्च करने के लिए नए सिरे से कार्ययोजना बनाकर इसकी स्वीकृति लेनी होगी। कुल मिलाकर अधिकारियों की लापरवाही के कारण लाखों के इस बजट का उपयोग कुपोषण मिटाने के लिए नहीं हो सका।
मंत्री ने दिया था बजट
पिछले वर्ष पोहरी विकासखंड के नेहरगढ़ा, छर्च, बैराड़, मुडख़ेड़ा, ऊमरी, बिलोड़ी आदि क्षेत्र में कुपोषण से बच्चों की मौत होने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री रंजना बघेल ने इस क्षेत्र में दौरा कर पोहरी अनुविभाग में अटल बाल आरोग्य मिशन के तहत 33 लाख रुपए का बजट विशेष कार्ययोजना के लिए दिया था। इस बजट के तहत कुपोषण मिटाने के लिए विशेष कार्य योजना बनाकर इस क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारियों ने बजट तो प्राप्त कर लिया मगर इस बजट का जमीनी स्तर पर कोई उपयोग नहीं किया।
एनआरसी जिले में संचालित
अति कम वजन के बच्चे जिले में
फैक्ट फाइल
मैं पता करता हूं,क्यों खर्च नहीं किया
॥ यह बात सही है कि कुपोषण को मिटाने के लिए यह बजट दिया गया था। मैं इस बारे में अधिकारियों से पता करता हूं कि जिले के अधिकारी इस बजट को क्यों खर्च नहीं कर पाए। अगर इस मामले में अधिकारियों ने लापरवाही दिखाई होगी तो कार्रवाई की जाएगी। ञ्जञ्ज
सुरेश तोमर,संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास ग्वालियर
अब डे केयर सेंटरों पर खर्च करेंगे
॥ जनवरी 2013 में जब मैंने जिले में ज्वाइन किया था तो दो माह ही मेरे पास इस बजट को खर्च करने के लिए बचे थे। पूर्व के अधिकारी इस 33 लाख के बजट को क्यों खर्च नहीं कर पाए यह तो वही बता पाएंगे। बीच में हमने इस बजट में से लगभग 5 लाख रुपए से जिले में कुछ स्वास्थ्य शिविर भी लगाए। अब हमने निर्णय लिया है कि कुपोषण मिटाने के लिए जो डेकेयर सेंटर संचालित हो रहे हैं उनका संचालन इस बजट से किया जाएगा। ञ्जञ्ज
उपासना राय,डीपीओ, महिला एवं बाल विकास शिवपुरी
यह आ रही है समस्या
ञ्च पोहरी में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां कुपोषण बड़े पैमाने पर है।
ञ्च नेहरगढ़ा, छर्च, बैराड़, मुडख़ेड़ा आदि में कुपोषण के कारण बीते तीन साल में कई मौतें हो चुकीं हैं।
ञ्च यहां बच्चे जन्म से कुपोषित पैदा हो रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव है।
ञ्च बच्चों को विशेष पोषण आहार न मिलने के कारण वह कुपोषण की चपेट में हैं।
ञ्च समय पर टीके नहीं लगते जिससे वह बीमारी की चपेट में हैं। स्वास्थ्य शिविर लग नहीं रहे।
ञ्च पोहरी में ही एक एनआरसी जबकि अभी तक दूसरे स्थान पर एनआरसी नहीं खुल सका है।
यह होते काम
ञ्च नया बजट खर्च होता तो विशेष कार्य योजना के तहत कुपोषित बच्चों का इलाज होता।
ञ्च इस बजट से स्वास्थ्य शिविर लगाने थे जिनमें कुपोषित बच्चों को चिंहित कर उनको एनआसी में भर्ती कराना था।
ञ्च पोहरी में जो डे केयर सेंटर शुरू किए गए थे वहां चिह्नित कर कुपोषित बच्चों को विशेष पोषण आहार दिया जाता।
ञ्च दवाएं, खिलौने एवं नई एनआरसी खुलती तो बच्चों को बेहतर इलाज मिलता।
ञ्च चिन्हित इलाकों में नई कार्य योजना बनाकर कार्य होता और संसाधन बढ़ाए जाते तो कुपोषण मिटाने के लिए सुधार के कारगर कदम उठाए जा सकते थे।
अनदेखी - पिछले साल मंत्री के निर्देश पर आया था 33 लाख का बजट
सहायिकाएं पदस्थ
आंगनबाडी कार्यकर्ता पदस्थ
जिले में आंगनबाडी केन्द्र