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सीईओ बोले- काम नहीं तो मानदेय किस बात का, रोजगार सहायक बोले- मजदूर ही नहीं मिले

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - दतिया
जिले की २९० ग्राम पंचायतों में से ६९ ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायकों के मानदेय का भुगतान कर दिया गया है, जबकि शेष पंचायतों के रोजगार सहायक मानदेय के भुगतान के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को रोजगार सहायकों ने भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को ज्ञापन दिया। साथ ही क्षेत्र के सांसद अशोक अर्गल ने भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव को पत्र लिखा है।
मालूम हो कि ग्राम रेाजगार सहायक १५ महीने के मानदेय के भुगतान के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका एक दल भोपाल में मनरेगा के आयुक्त से मिला। उन्होंने भी मामले में शीघ्र ही उचित निर्णय करने की बात कही।
नियुक्ति पत्र में स्पष्ट- काम करने पर ही मिलेगा मानदेय का भुगतान : प्रत्येक पंचायत को एक महीने में एक लाख रुपए का काम कराना था। जिले की २२१ ग्राम पंचायतों में एक महीने में एक लाख रुपए का काम नहीं हुआ। जब रोजगार सहायकों की नियुक्ति हुई थी, तभी यह स्पष्ट कर दिया गया था कि काम करने की स्थिति में ही मानदेय का भुगतान किया जाएगा। ६९ ग्राम पंचायतों नियत काम कर दिया। इसलिए उन्हें भुगतान कर दिया गया। लेकिन जिनके यहां काम नहीं हुए उनका मानदेय भुगतान रोक दिया गया। साथ ही १५ जनवरी को रोजगार सहायकों को प्रशासन ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि आपकी ग्राम पंचायत में काम नहीं हुआ है, इसलिए आप इसका कारण बताएं। लेकिन रोजगार सहायकों ने कारण बताने के बजाय आंदोलन शुरू कर दिया।




मानदेय न देना आपराधिक कृत्य

रोजगार सहायकों को १५ महीने से वेतन न देना आपराधिक न्यास भंग की श्रेणी में शामिल है। प्रशासन को रोजगार सहायकों के मानदेय का भुगतान किया जाना चाहिए। यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। यह बात जिला न्यायालय के अधिवक्ता महिपाल सिंह कौरव ने कही। शासन ने संविदा का उल्लंघन किया है। इसके लिए रोजगार सहायकों को सिविल न्यायालय में मामला दर्ज किया जाना चाहिए। अधिवक्ता श्री सिंह ने रेाजगार सहायकों को हर संभव समर्थन देने की बात कही।

शासन के निर्देश के हिसाब से करेंगे काम

शासन से रोजगार सहायकों के मानदेय के भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन मांगा है। जो भी निर्देश मिलेंगे, उसके हिसाब से काम किया जाएगा। नियमानुसार काम नहीं होने पर मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।ञ्जञ्ज

संदीप माकिन, सीईओ जिला पंचायत दतिया।

॥ई पेमेंट के कारण मजदूरों को भुगतान नहीं किया गया। इससे मजदूरों ने काम नहीं किया। रोजगार सहायकों के मानदेय का भुगतान किया जाना चाहिए।ञ्जञ्ज

रोहित दंागी, जिलाध्यक्ष ग्राम रोजगार सहायक संघ दतिया

पहले रोजगार सहायक नोटिस का तो जवाब दें

॥उन रोजगार सहायकों का मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है, जिनकी पंचायत में काम नहीं हुआ। रोजगार सहायकों की नियुक्ति में ही यह शर्त थी कि काम करने पर ही मानदेय का भुगतान होगा। लेकिन प्रशासन चाहता है कि रोजगार सहायकों को भुगतान हो। हमने इस संबंध में रोजगार सहायकों को नेाटिस जारी किया था। इन्होंने नोटिस का जवाब देने के बजाय आंदोलन शुरू कर दिया। इन्हें नोटिस का जवाब देना चाहिए। ताकि प्रशासन इनके उचित जवाब को शासन तक भेज सके।ञ्जञ्ज

रघुराज राजेंद्रन, कलेक्टर, दतिया



रोजगार सहायकों के समर्थन में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते सरपंच।

रोजगार सहायक बोले- ई-पेमेंट के फेर में मजदूरों के भुगतान में हुइ्र्र देरी, इसलिए नहीं मिले

रोजगार सहायकों का कहना है कि ई-पंचायत के माध्यम से मजूदरों को मजदूरी का भुगतान किया जाना था लेकिन मजदूरों का भुगतान समय पर नहीं हुआ। इस कारण मजदूर नहीं मिले और न ही उन्होंने काम मांगा। इसलिए पंचायतों में काम नहीं हो पाए। इसका खामियाजा हम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।



कार्रवाई - जिनकी पंचायत में नहीं हुए काम, उनका मानदेय का भुगतान अटका