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भाव से लो भगवान का नाम : पाठक

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - दतिया
भगवान भाव का भूखा है। भाव के साथ भगवान का नाम लेने से जीवन में चमत्कार होते हैं, जो भक्त भगवान को भाव के साथ याद करते हैं, भगवान ऐसे भक्तों की नैया पार लगा देते है। चिरईटोर माता मंदिर पर चल रही देवी भागवत कथा के तीसरे दिन यह बात कथा वाचक दिनेश पाठक ने कही।
उन्होंने कहा कि दिन भर नहाने, कपड़े बदलने व शुद्धता का प्रदर्शन करने से कुछ नहीं होता। जब तक भक्त के मन में भगवान के प्रति श्रद्धा भाव नहीं होगा, उसे कुछ प्राप्त नहीं हो सकता। श्री पाठक ने ऋषि वाल्मीकि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वाल्मीकि ने भाव के साथ भगवान का उल्टा नाम लिया। भाव के साथ उल्टा नाम भी सीधा हो गया। भगवान प्रसन्न हुए और वाल्मीकि ब्रह्म ऋषि बन गए। देवी कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवती की दस उंगलियों से भगवान के दशावतार हुए हैं। उन्होंने कहा कि क्रोध का परिणाम अच्छा नहीं होता। क्रोध कोई भी करे, क्रोध से किसी समस्या का समाधान नहीं होता। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण को क्रोध नहीं करना चाहिए। भगवान परशुराम को जब क्रोध आया तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कथा के साथ कार्यक्रम में शतचण्डी यज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है। सुबह आठ बजे से 11 बजे तक शतचण्डी यज्ञ के आयोजन के बाद दोपहर एक बजे से कथा का आयोजन किया जाता है।



दतिया। चिरईटोर माता मंदिर पर चल रही देवी भागवत कथा में उपस्थित महिलाएं।