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सद्कर्म इंसान को आवागमन से मुक्त करते हैं- दिव्यानंदजी

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - मनासा
मानव जीवन बड़े ही सौभाग्य से मिलता है। जीव कई योनियों में भटकता है। फिर इंसान का शरीर मिलता है। इंसान को अपने जीवन में सद्कर्म करना चाहिए। सद्कर्म ईश्वर से मिलाते हैं। आवागमन के बंधन में मुक्त कराते हैं।
यह बात स्वामी दिव्यानंदतीर्थ महाराज ने कही। वे मंगलवार को रामद्वारा में देवी भागवत कथा कर रहे थे। उन्होंने कहा इंसान के जीवन में तीनों गुणों का होना अनिवार्य है। जीवन में सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण होते हैं। जब इंसान के जीवन में गुणों का समावेश होता है तो जीवन सफल हो जाता है। इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सतोगुण दीपक में घी के समान है। तमोगुण माचिस की तीली है। रजोगुण रुई की बाती। इंसान को अपने गुणों के साथ कर्म करना चाहिए। संसार के बंधनों से मुक्ति दिलाते हैं।
अच्छे कर्मों का फल हमेशा अच्छा होता है। बुरे कर्मों के परिणाम खराब होते हैं। कथा में देवी शक्ति की महिमा बताई गई। नारी को देवी का रूप बताया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।