आज से किसानों की मुसीबत
सिटी रिपोर्टर - नीमच
खाद्य सुरक्षा कानून प्रदेशभर के किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। इसके विरोध में विरोध में प्रदेश की अधिकांश मंडियों में व्यापारियों ने खरीदी बंद कर दी है। शुक्रवार से नीमच के व्यापारी भी खरीदी नहीं करेंगे। इससे किसानों की मुसीबत बढ़ जाएगी।
केंद्र सरकार ने अगस्त 11 में खाद्य सुरक्षा कानून लेागू कर दिया। प्रदेश में कानून लागू करने या नहीं। इसका अधिकार राज्य सरकारों को दिया। कानून राजस्थान, पंजाब सहित कुछ राज्य पहले ही नकार चुके हैं। मप्र सरकार ने इसे लागू कर 4 फरवरी 2014 तक के लिए छूट दी। छूट की सीमा समाप्त नजदीक आते ही प्रदेश की अधिकांश कृषि उपज मंडियों के व्यापारियों ने खरीदी बंद कर दी है। शुक्रवार से नीमच मंडी भी बंद हो
जाएगी। इससे किसानों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी।वे उपज नहीं बेच सकेंगे। मंडी कब खुलेगी इसका भी किसी के पास जवाब नहीं है।
कम भाव में बेचना पड़ेगी
कानून लागू होता है तो उपज खराब होने पर किसान भंडारण नहीं कर सकेंगे। उपज कम-ज्यादा जो भी भाव हो उसमें बेचना पड़ेगी। किसानों के लिए ग्रेडिंग की समस्या होगी।
मंडी प्रशासन के पास नहीं व्यवस्था
मंडी व्यापारी संघ ने बुधवार को मंडी प्रशासन को ज्ञापन देकर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उपज की खरीदी से पहले तय मानकों के निर्धारण की व्यवस्था करने की मांग की। लेकिन मंडी प्रशासन के पास कोई समाधान नहीं है। नीमच मंडी में हजारों किसान उपज लेकर आते हैं। मंडी प्रशासन ने मानकों के निर्धारण की व्यवस्था के मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया
॥ खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर व्यापारियों ने मंडी प्रशासन से मानकों के निर्धारण की व्यवस्था की मांग की। ऐसा नहीं होने पर मंडी बंद करने की बात कही। व्यापारियों के निर्णय से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया। समाधान तो प्रदेश स्तर पर ही होगा।
आरएस बघेल, सचिव, कृषि उपज मंडी
महासंघ के निर्देश पर बंद की खरीदी
॥ व्यापारी महासंघ से मिले निर्देश के बाद मंडी में खरीदी बंद करने का निर्णय लिया है। मंडी में कृषि उपज की खरीदी में खाद्य सुरक्षा कानून के मानकों का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
राजेश मंत्री, सचिव, मंडी व्यापारी संघ, नीमच
किसानों को फेंकना पड़ सकती आधी उपज
भारत में खेती को मानसून का जुआं कहा जाता है। उपज का उत्पादन और क्वालिटी पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है। बारिश कम या ज्यादा होने, मावठे, पाले से फसल खराब हो जाती है। अभी तो उपज क्वालिटी के आधार पर बिक जाती है लेकिन कानून लागू होने के बाद किसानों के पास आधी उपज फेंकने के अलावा कोई उपाय नहीं रहेगा। इससे किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसान विरोधी है कानून
॥ खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने से किसानों की परेशानी बढ़ जाएगी। प्राकृतिक प्रकोप के चलते उपज की क्वालिटी बिगडऩे पर किसान बेच नहीं पाएंगे।यह कानून किसान विरोधी है। भारतीय किसान संघ इसका विरोध करेगा।
राधेश्याम धनगर, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, नीमच
प्रदेश सरकार चाहे तो विरोध करे
॥खाद्य सुरक्षा कानून विश्व व्यापार संगठन के दबाव में लिया निर्णय है। प्रदेश सरकार चाहे तो लागू करे चाहे तो विरोध करे। प्रदेश में इसे लागू करना किसानों पर दोहरी मार है। किसान संघ विरोध करेगा।
सुरेश गुर्जर, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, मध्यप्रदेश
मंडी में गुरुवार को बोली लगाते व्यापारी। फोटो भास्कर