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कृष्ण की कृपा से द्वारिका में बदली सुदामापुरी

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता - मनासा
पोटली में बंधे चावल सुदामा से श्रीकृष्ण ने छीन लिए। एक मुठ्ठी चावल खाए तो संसार का सारा ऐश्वर्य दे दिया। दूसरी मुठ्ठी चावल खाए तो इंद्र लोक का सुख न्योछावर कर दिया। कृष्ण की कृपा से सुदामापुरी द्वारिका में बदल गई।
यह बात पं. भीमाशंकर शर्मा ने कही। वे पिपल्याहाड़ी में श्रीमद्भागवत कथा में बोल रहे थे। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित और परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा बचपन में गुरुकुल में कृष्ण के हिस्से के चने खाने से सुदामा को गरीबी देखना पड़ी। दरिद्रता से परेशान सुदामा की पत्नी ने उन्हें श्रीकृष्ण से
मिलने भेजा।
सुदामा की आवभगत में द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ने पलक-पावड़े बिछा दिए। भगवान ने सुदामा के चावल खाए और तीनों लोकों के सुख न्योछावर कर दिए। सुदामा की टूटी-फूटी झोपड़ी महल बन गई। पड़ोसियों के घरों की जगह भी महल खड़े कर दिए। सारी सुदामापुरी द्वारिका की तरह हो गई और सुदामा की दशा बदल गई। मित्रता हो तो श्रीकृष्ण व सुदामा जैसी। पं. शर्मा ने राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग भी सुनाया। श्रीमद् भागवत कथा सुनकर परीक्षित के मन में मौत का भय दूर हुआ और परम पिता परमात्मा से जुड़ाव हुआ। शुकदेव महाराज से राजा परीक्षित ने कथा का ज्ञान लिया और तक्षक नाग के काटने से उनकी ईहलीला समाप्त हुई। परीक्षित को मोक्ष मिला। कथा पूरी होते ही श्रीहरि के जयकारे गूंज उठे।भागवत पोथी की महाआरती हुई। श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया और प्रसादी बांटी।