लागत बढऩे से रुका अंडरब्रिज का काम
भास्कर संवाददाता - जावरा
लागत बढऩे से भीमाखेड़ी रेलवे फाटक पर अंडरब्रिज का निर्माण रुक गया है। एसओआर ((शेड्यूल ऑफ रेट्स)) बदलने से ब्रिज के बॉक्स लगाने की लागत 30 लाख से बढ़कर ४७ लाख हो गई है। अब बढ़ी राशि राज्य शासन से स्वीकृत होने के बाद ही काम शुरू होगा। ऐसे में ब्रिज का काम छह महीने लेट हो सकता है। इससे नगर सहित क्षेत्र के ४० गांवों के हजारों लोग प्रभावित होंगे।
भीमाखेड़ी रेलवे फाटक पर अंडरब्रिज का निर्माण नवंबर २०१३ में शुरू हुआ था। बॉक्स भी बनने लगे थे। लोक निर्माण विभाग की सेतु विंग ने भी एप्रोच रोड के लिए खुदाई शुरू कर दी थी। इस बीच लागत बढऩे से काम रुक गया। पटरी के नीचे बॉक्स लगाने का काम रेलवे कर रहा है। एप्रोच रोड का काम लोक निर्माण विभाग की सेतु विंग के जिम्मे है। रेलवे के पास ३० लाख रुपए लागत का काम था जो बढ़कर ४७ लाख रुपए हो गई है। एप्रोच रोड की लागत लगभग ६५ लाख यथावत है।
ऐसा बनेगा अंडरब्रिज
भीमाखेड़ी फाटक पर २.५ मीटर ऊंचाई और ४.५ मीटर चौड़ाई वाला आरयूबी ((रेलवे अंडरब्रिज)) बनेगा। इसकी पश्चिम दिशा में भीमाखेड़ी तरफ ७५ मीटर और पूर्व दिशा में फोरलेन तरफ ६५ मीटर एप्रोच रोड बनेगा। ४७ लाख लागत के आरयूबी बनाने का काम रेलवे और ६५ लाख लागत के एप्रोच रोड का काम लोनिवि की सेतु विंग कर रही है। सीमेंट-कांक्रीट के ७ बॉक्स लगेंगे।
ये होगी सुविधा
अंडरब्रिज बनने से भीमाखेड़ी-कालूखेड़ा रूट के ४० से अधिक गांवों के हजारों लोग जावरा से सीधे जुड़ सकेंगे। अभी इन्हें २ किमी दूर चूरुवाला दाल मिल के पास होकर आना-जाना पड़ रहा है। कालूखेड़ा, भीमाखेड़ी क्षेत्र से जावरा में पढऩे के लिए आने वाले 500 से अधिक विद्यार्थियों को कम दूरी तय करना पड़ेगी। फाटक बंद होने से ताल-जावरा-कालूखेड़ा रूट बंद हो गया था जो फिर से खुलने पर आवागमन सुगम होगा। भीमाखेड़ी स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर और मामटखेड़ा पहाड़ी स्थित श्रीरोग्या देवी मंदिर जाने वाले शहरवासियों को भी सुविधा होगी। काम रुकने से अभी इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।
इसलिए बढ़ गई लागत
रेलवे ने पहले जो एस्टीमेट तैयार किया था वह पुरानी एसओआर के अनुसार था। फरवरी २०१३ में राज्य शासन से जारी एसओआर बदल गया। इसके अनुसार निर्माण सामग्री की दरें बढऩे से लागत भी बढ़ गई। एप्रोच रोड का एस्टीमेट नए एसओआर अनुसार ही बना था इसलिए उसमें बढ़ोतरी नहीं हुई।
लागत बढ़ गई
॥एसओआर बदलने से ब्रिज की लागत बढ़ गई है। राशि स्वीकृत होने पर आगे का काम होगा। इसके लिए सेतु विंग को पत्र लिखा है।ञ्जञ्ज
प्रदीप शर्मा, पीआरओ रेल मंडल रतलाम-इंदौर
आगे क्या
रेलवे ने बढ़ी हुई लागत अनुसार अंतर की राशि १७ लाख रुपए जमा करवाने के लिए लोनिवि की सेतु विंग को पत्र लिखा है। इस आधार पर सेतु विंग राज्य शासन को प्रस्ताव भेजेगी। वहां से राशि स्वीकृति होने के बाद रेलवे के खाते में जमा होगी। इसके बाद काम शुरू होगा। इसमें दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इसके बाद काम शुरू होगा। इस तरह ब्रिज तैयार होने में ६ महीने तक लग सकते हैं।
लागत बढऩे से रेलवे ने निर्माण रोक दिया है। अब अंतर की राशि स्वीकृत होने के बाद ही काम शुरू होगा।
रेलवे ने १७ लाख रुपए मांगे हैं
॥रेलवे ने १७ लाख रुपए जमा करवाने के लिए कहा है। इस आधार पर विभाग राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजेगा। वहां से स्वीकृति मिलने पर रेलवे के खाते में राशि जमा करवा देंगे। एप्रोच रोड का काम तो मावठे के कारण रोक दिया था जो जल्द शुरू हो जाएगा।ञ्जञ्ज - एम.एल. श्रीवास्तव, इंजीनियर सेतु विंग लोनिवि रतलाम