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- ञ्च कोहरा और सर्दी से जल गए चने के फूलञ्च गेहूं के लिए सर्दी हो रही फायदेमंद साबित
ञ्च कोहरा और सर्दी से जल गए चने के फूलञ्च गेहूं के लिए सर्दी हो रही फायदेमंद साबित
कार्यालय संवाददाता - सीहोर
खरीफ फसलों में कोहरे की मार के कारण पहले ही चने में नुकसान नजर आ रहा था। ऐसे में मंगलवार रात में हुई बारिश से नुकसान का अंदेशा और अधिक बढ़ गया है। खासकर चने में नुकसान अधिक बताया जा रहा है। किसानों की मानें तो चने 50 फीसदी की फसलों में ठंड और शीत लहर का प्रभाव नजर आ रहा है। यदि मौसम में अब भी उतार-चढ़ाव चलता रहा तो नुकसान का प्रतिशत और अधिक बढ़ जाएगा। लेकिन मौसम विभाग अभी नुकसान से इंकार कर रहा है।
रबी फसलों पर संकट के बादल अब भी छाए हुए हैं। पहले लगातार कोहरा छाए रहने और ठंड से फसलों में नुकसान हुआ था। इसके बाद उत्तरी भारत में हुई बर्फबारी और बारिश के कारण मौसम ने फिर करवट ली और सर्द हवाओं ने चने की फसल को फिर पूरी तरह से झुलसा दिया। इसके साथ ही हल्की बूंदाबांदी और बादलों के कारण चने पर इल्लियों का प्रकोप भी बढ़ गया था। लेकिन अब भी बादल छाए हुए हैं जो फसलों पर विपरीत असर डालेंगे। किसानों का कहना है कि इस बार कोहरा और पाले से ज्यादा नुकसान हुआ है। हालांकि अभी गेहूं की फसलों की स्थिति अच्छी है। यदि बारिश तेज होती है तो गेहूं में भी नुकसान होगा।
गेहूं के लिए अमृत
विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान मौसम गेहूं फसलों के लिए श्रेष्ठ है। सर्दी गेहूं के पौधों की बढ़त के लिए जरूरी है। लेकिन यदि बारिश तेज होती है तो गेहूं में नुकसान हो सकता है। कोहरा और बादल चने के लिए मुसीबत साबित हो सकते हैं।
सीहोर। बारिश के बाद हवा से गेहूं की फसलें भी फैल गईं।
सोयाबीन में भी हुआ था नुकसान
खरीफ फसल में सोयाबीन में भी भारी नुकसान हुआ था। लगातार बारिश के कारण उत्पादन पर असर पड़ा था। स्थिति यह थी कि एक हेक्टेयर क्षेत्र में 5 से 7 क्विंटल तक सोयाबीन की पैदावार ही हुई थी। यहां तक कि बारिश के कारण आई बाढ़ ने नदी के आसपास के पूरे क्षेत्र में ही सोयाबीन पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।
उद्यानिकी फसलों में भी ज्यादा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार रबी फसलों में तो ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उद्यानिकी फसलों में नुकसान अधिक हुआ है। खासकर टमाटर, लौकी, आलू आदि सब्जियों और फूल की फसलों में नुकसान देखा गया है। कोहरे के कारण अधिकांश सब्जियां सडऩे लगी थीं और फूल भी मुरझाकर गिरने लगे थे। इससे किसानों को खासा नुकसान हुआ था।
फसलों की हालत बेहतर
॥अभी फसलों की स्थिति अच्छी है। इस बार तापमान भी ज्यादा नीचे नहीं गिरा, इसलिए नुकसान का अंदेशा कम है। पाले से कुछ क्षेत्रों में नुकसान की खबर मिली है।
रामेश्वर पटेल, उपसंचालक कृषि
परेशानी किसानों की जुबानी
॥ इस बार मौसम अच्छा था, गेहूं की फसल तो ठीक है लेकिन पाले से चने में नुकसान हुआ है।
रमेशचंद्र मेवाड़ा, किसान
॥ पहले पाले ने नुकसान पहुंचाया था। अब पिछले दिनों से चल रही सर्द हवा से चना फसल प्रभावित हो रही है।
राधेश्याम पाटीदार, कृषक
उत्पादन में कमी के आसार
> जब चने में फूल आए थे उस समय पाले ने भारी नुकसान पहुंचाया था। पूरे फूल ठंड के कारण जल गए थे।
> इसके बाद अचानक मौसम में बदलाव आया और गर्मी बढ़ गई। इससे पौधों की ग्रोथ रुक गई थी।
> उत्तरी भारी में बर्फबारी के बाद फिर से क्षेत्र में शीतलहर चली, जो सबसे ज्यादा नुकसानदायी साबित होगी।
> जिले में कई स्थानों पर बारिश के साथ ओले भी गिरे।
> हल्की बारिश के साथ आसमान में बादल छाए हुए हैं, जिससे चने में इल्लियां लग रही हैं।
3.63 लाख हेक्टेयर में हुई थी बोवनी
जिले में गेहूं की बोवनी 2 लाख 38 हजार 200 हेक्टेयर में हुई थी। इसी प्रकार चना, मटर, मसूर, तिवड़ा की बोवनी 1 लाख 21 हजार 500 हेक्टेयर में हुई थी। इस बार पाला पडऩे से चने में नुकसान ज्यादा हुआ है।
सीहोर. बारिश और ठंड के कारण चना फसल के फूल जल रहे हैं, इससे उत्पादन प्रभावित होगा।
रबी की फसल फिर संकट में
नुकसान - 1.15 लाख हेक्टेयर में हुई थी चने की बोवनी, पाला और बारिश से संकट
आष्टा . शुजालपुर . इछावर . कालापीपल . बुधनी रेहटी . श्यामपुर . नसरुल्लागंज . जावर
सीहोर भास्कर
भोपाल, गुरुवार
२३ जनवरी 20१४