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बार-बार बदलते मौसम से फसलों पर मंडराया खतरा
निज संवाददाता - सिरोंज
मौैसम का मिजाज इन दिनों क्षेत्र के किसानों की धड़कने बढ़ाने का काम कर रहा है। सप्ताह भर से आसमान पर बादल छाए हुए हैं। इससे चने और मसूर की फसल पर पाला पडऩे की आशंका बन रही है। अगले चार-पांच दिनों तक मौसम के अगर यही हाल रहे तो किसानों को नुकसान होने की आशंका हो सकती है।
वर्ष 2013 के अंत में हुई बारिश ने किसानों के चेहरों पर जो रौनक बिखेरी थी, वह अब गायब होती दिखाई दे रही है। इसकी वजह मौसम बदल रहा है। जनवरी के पहले पखवाड़े में दो साल बाद क्षेत्र का मौसम रबी की फसल के मिजाज के अनुरूप हुआ था।
सप्ताह भर से जो हालात बने हैं वे किसानों को चिंता में डाल रहे है। एक तरह से क्षेत्र में बादलों ने स्थाई डेरा डाल रखा है। इस दौरान हल्की बूंदाबांदी भी हो रही है। मंगलवार-बुधवार को भी बादल छाए रहे तथा हल्की बूंदाबादी भी हुई। इसके बाद दिनभर सर्द हवाएं लोगों को ठिठुराती रही। बादलों का लगातार छाया रहना ही किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।
किसान रघुवीर कुशवाह ने बताया कि अगर ये बादल बारिश में तब्दील होते हैं तो चने की जिस फसल पर फूल आना शुरू हुए हैं उसके फूल झडऩे की आशंका बन गई है। यही हाल मसूर और सरसों की फसल का भी होने की आशंका है। बादलों के इसी पहरे के बीच पाला पडऩे की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर अगर तेज बारिश होती है तो उसके प्रभाव से चने और मसूर की फसल का फूल टूटने की आशंका बन गई है। किसान रामप्रसाद दांगी ने बताया कि जो हाल बन रहे हैं उसमें कोई कुछ नहीं कर सकता है।
केवल मौसम में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। वहीं बड़ी संख्या में किसान अपनी गेहूं की फसल में सिर्फ इस वजह से पानी नहीं दे पा रहे हैं कि बारिश हो जाए। अगर फसल में पानी देने के बाद बारिश होती है तो खेतों में अधिक पानी की स्थिति हो जाएगी।
35 हजार हेक्टेयर में है चने की फसल
चने के भाव में साल भर से लगातार बनी मंदी के बावजूद क्षेत्र के किसानों ने एक बार फिर चने की बोवनी की ओर रूझान दिखाया है। जबकि मसूर की फसल में लगातार नुकसान को देखते हुए बेहद कम किसानों ने मसूर की बोवनी की है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष सिरोंज क्षेत्र में 35 हजार 5 सौ हेक्टेयर में चना तथा मात्र 3 हजार 150 हेक्टेयर में मसूर की बोवनी हुई है। वहीं लटेरी में 22 हजार 600 हेक्टेयर में चना तथा मात्र 850 हेक्टेयर में मसूर तथा कुरवाई में 33 हजार हेक्टेयर में चना एवं 8 हजार हेक्टेयर में मसूरी की बोवनी हुई है।
चने और मसूर को हो सकता है नुकसान
॥सप्ताह भर से मौसम का जो मिजाज बना हुआ है वह चने और मसूर की फसल के लिए नुकसानदायक है।
टीएस त्रिपाठी,
एसडीओ कृषि विभाग सिरोंज
असर - एक सप्ताह से छाए हैं बादल, रोज हो रही बूंदाबादी, पाले की आशंका बढ़ी
ञ्चरुक-रुक कर हो रही बारिश से चली शीत लहर
सिरोंज। कड़ाके की सर्दी के चलते फसलों पर मंडराया खतरा।