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एक साल से 50 लाख के चार भवन पड़े बेकार

8 वर्ष पहले
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निज संवाददाता - बरेली
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के रहने के लिए करीब पचास लाख रुपए खर्च करके चार आवास बनाए गए थे। इन्हें बने हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन खाली पड़े हुए हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि लोक निर्माण विभाग ने अभी तक इन्हें स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है।
रात में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को बिना देर किए इलाज मिल सके, इसलिए परिसर में ही डॉक्टरों के आवास की मांग की जाती रही है। शासन ने भी इस जरूरत को स्वीकार करते हुए डॉक्टरों के लिए चार आवास बनाने की स्वीकृति दे दी थी। इनका निर्माण भी हो चुका, लेकिन हस्तांतरण के अभाव में ताले लटके हुए हैं। इससे आपात स्थितियों में भी डॉक्टरों को आने में देर हो जाती है। कई बार इस कारण मरीजों के परिजनों और डॉक्टरों के बीच तकरार की स्थिति भी बन जाती है।
एक साल से ताले में
डॉक्टरों के लिए बने आवास करीब एक साल पहले ही तैयार हो चुके हैं। इनके हस्तांतरण में न तो स्वास्थ्य विभाग रुचि ले रहा है और न ही लोक निर्माण विभाग ने पहल की है। नतीजा यह है कि चारों सरकारी आवासों में ताले लटके हुए हैं। मजबूरी में डॉक्टर दूसरी जगह रह रहे हैं। यानी लाखों रुपए खर्च होने का कोई नतीजा नहीं निकला है।
करोड़ों के निर्माण अनुपयोगी
नगर में छात्रावास, ऑडीटोरियम और अन्य करीब एक दर्जन भवन ऐसे हैं, जो तीन साल से भी अधिक पहले तैयार हो चुके हैं। इन सभी की लागत जोड़ी जाए तो यह करोड़ों में है। संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण अभी भी ये अनुपयोगी बने हुए हैं। अनुविभाग में तो ऐसे सरकारी भवनों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा है, जिनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।
लापरवाही है कारण
करोड़ों की लागत के सरकारी भवनों की दुर्दशा के पीछे सरकारी विभागों की लापरवाही मुख्य वजह है। कई भवनों में मामूली काम बकाया रहने से इन्हें हस्तांतरित नहीं किया जाता। विभाग भी यह भूल जाते हैं कि इतनी लागत व्यर्थ ही जा रही है। कई भवन तो उपयोग में आने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। तीन छात्रावास और सरकारी बालक हायर सेकंडरी स्कूल में हुए निर्माण इनमें शामिल हैं।




जल्द सौंप देंगे भवन

॥ऐसे भवनों का निर्माण मेरे कार्यकाल से पहले हुआ है। पुराना रिकार्ड देखकर ही बताया जा सकता है कि ऐसे कितने सरकारी भवन हैं और इन पर कितनी लागत आई थी। हम यह भी देखेंगे कि किन कारणों से इन्हें संबंधित विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया। जल्द ही इन्हे सौंप दिया जाएगा।ञ्जञ्ज

आरके वर्मा,

एसडीओ लोनिवि बरेली

करा रहे सूची तैयार

॥हम ऐसे सरकारी भवनों की सूची तैयार करा रहे हैं, जो एक साल या इससे पहले तैयार हो चुके हैं और अभी तक उपयोग में नहीं आ रहे हैं। इनके कारण पता लगाकर इन्हें संबंधित विभागों को हस्तांतरित किए जाने की कार्रवाई कराएंगे।ञ्जञ्ज

संजय श्रीवास्तव, एसडीएम बरेली

बरेली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में डॉक्टरों के आवास बनने के बाद भी एक साल से खाली पड़े हैं।

परिसर के बाहर रहने को मजबूर हैं डॉक्टर, अंचल में सालों से अनुपयोगी हैं करोड़ों की लागत के सरकारी भवन