अधिनियम के विरोध में नीलामी से इंकार
बेगमगंज। मंडी प्रांगण में उपज नहीं बिकी।
खरीदी से किया इंकार
॥बुधवार को मंडी में नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई। व्यापारियों ने नीलामी में भाग लिया लेकिन किसानों का अनाज देखने के बाद व्यापारियों ने उसे अमानक बताते हुए खरीदने से इंकार कर दिया।ञ्जञ्ज
सुरेश शर्मा, सचिव कृषि उपज मंडी समिति
ञ्चनीलामी के दौरान किसानों का अमानक स्तर का अनाज देखकर भड़के व्यापारी
ञ्चअनाज बेचने के लिए मंडी आए दर्जन भर किसानों को बैरंग लौटना पड़ा
विरोध - तीन दिन की हड़ताल के बाद खुली थी मंडी
निज संवाददाता - बेगमगंज
खाद्य अधिनियम के विरोध में बुधवार को मंडी में नीलामी नहीं हो सकी। तीन दिन से चल रही व्यापारियों की हड़ताल खत्म होते ही कृषि मंडी में बुधवार को करीब एक दर्जन किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे। नीलामी प्रक्रिया शुरू होते ही व्यापारियों द्वारा जब किसानों का चना,सोयाबीन देखा तो वह पुराना डंकी,दागी एवं घुन लगा पाए जाने पर उन्होंने लेने से इंकार कर दिया। नीलामी प्रक्रिया शुरू होते ही इस मुद्दे पर बात अटक गई कि यदि व्यापारी किसानों का अमानक स्तर का अनाज लेते हैं तो उनके लिए खाद्य सुरक्षा मानक कानून 2006 नियम 2011 का उल्लंघन करना पड़ेगा। उक्त कानून के विरोध में अनाज, दलहन, तिलहन व्यापारी एसोसिएशन अध्यक्ष संजय मुणोत सहित पदमचंद जैन, जिनेन्द्र जैन,राहुल जैन बड्डे, सुगम मुनीम, अजय गुड्डा मसुरयाई, नवीन जैन,विनीत जैन, सुरेश राय,विवेक जैन, संजय मानकी आदि ने एक ज्ञापन कृषि उपज मंडी सचिव सुरेश शर्मा को दिया।
इसमें अमानक स्तर का अनाज नहीं खरीदने की घोषणा करते हुए कहा कि उक्त कानून के दायरे से जब तक उन्हें बाहर नहीं किया जाएगा, तब तक वे किसानों का माल नहीं खरीदेंगे।
निराश होकर लौटे किसान
40 बोरे सोयाबीन बेचने आए सागर जिले के ग्राम बरोदिया के किसान हुकमचंद,20 बोरा चना लेकर आए गैरतगंज तहसील के ग्राम बनडोली के किसान सुरेन्द्र कुमार, ग्राम खेजड़ा से ३० बारा चना लेकर आए नंदकिशोर धाकड़,बेरखेड़ी हरदौट पांच बोरा सोयाबीन लेकर आए नारायण सिंह तथा ग्राम तुलसीपार के राजेन्द्रसिंह गौर अपना 12 बोरा चना नहीं बेच पाए। इसके अतिरिक्त, 13 ट्राली सोयाबीन एवं चना अन्य किसान व्यापारियों द्वारा नीलामी में नहीं खरीदने पर परेशान होकर वापस चले गए।
किसानों ने कहा बढ़ेगी मुश्किलें
उपरोक्त किसानों ने बताया कि वह लघु एवं सीमांत कृषक हैं। पैसों की सख्त जरूरत होने के कारण अपना माल लेकर बेचने आए थे, लेकिन व्यापारियों द्वारा नहीं खरीदा गया। नगर में कोई भी व्यापारी हमारे माल को नहीं खरीद रहा है। ऐसे में हम लोग कहां जाएं,हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। प्राकृतिक आपदा से भी परेशान हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान व्यापारियों द्वारा अनाज नहीं खरीदे जाने से परेशान होकर वापस हो गए, उन्हें ट्रैक्टर-ट्राली का किराया अब कर्ज लेकर देना होगा।