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जनभागीदारी शुल्क लेने का किया विरोध

8 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - नरसिंहगढ़
जनभागीदारी शुल्क के नाम पर 200 रुपए लेने की बात प्रायवेट विद्यार्थियों को रास नहीं आई। इस पर उन्होंने अपना विरोध जताते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ प्रमोद भारतीय को आवेदन दिया है। विद्यार्थियों का कहना था कि प्रायवेट विद्यार्थी परीक्षाओं के दिनों को छोड़कर बाकी दिनों में कॉलेज की सुविधाओं का इस्तेमाल करते ही नहीं हैं। उनकी परीक्षा व्यय की राशि का भुगतान विश्वविद्यालय करता है। ऐसे में कॉलेज में सुविधाएं जुटाने के नाम पर उनसे जनभागीदारी शुल्क लेने का कोई औचित्य नहीं है। प्राचार्य ने उन्हें बताया कि यह फैसला पूर्व में गठित जनभागीदारी समिति ने लिया था। इसे वे नहीं बदल सकते हैं। इस पर विद्यार्थियों ने तय किया कि वे शुक्रवार को जनभागीदारी समिति की पदेन अध्यक्ष एसडीएम तृप्ति श्रीवास्तव से मिलकर अपनी मांग रखेंगे। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रवादी युवा मंच के जगदीश शास्त्री के साथ प्रायवेट परीक्षार्थी मान सिंह, विवेक शर्मा, रुचिका परमार, रूपेश सिंह, देवेंद्र शर्मा आदि शामिल थे।
पीजी कॉलेज में दो साल से नहीं जनभागीदारी समिति
शासकीय पीजी कॉलेज में पिछले 2 सालों से जनभागीदारी समिति नहीं है। फिलहाल इसमें एसडीएम पदेन अध्यक्ष हैं। स्थाई समिति नहीं होने से कॉलेज में शिक्षा सहित दूसरे क्षेत्रों में विकास की योजनाओं पर बड़े निर्णय नहीं हो रहे हैं। कॉलेज के छात्र लगातार उच्च शिक्षा विभाग से मांग करते आ रहे हैं कि जनभागीदारी समिति गठित कर दी जाए, लेकिन अब तक इस पर फैसला नहीं हुआ है।
सत्र की सबसे बड़ी परीक्षा
कॉलेज में गुरुवार को इस सत्र की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित की गई। दोपहर 2 से शाम 5 बजे की पाली में हुई परीक्षा में 500 परीक्षार्थियों ने बीएससी, बीसीए पांचवें सेमेस्टर ओल्ड कोर्स और
एटीकेटी परीक्षाओं, बीए तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा दी।



कॉलेज में नियमित विद्यार्थी

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शासन से नहीं मिलती राशि

कॉलेजों में सुरक्षा, छोटे मोटे काम आदि के लिए शासन पहले आकस्मिक निधि देता था। अब यह बंद कर दी गई है। अब चौकीदार, परीक्षा में पानी पिलाने और कमरों की सफाई के लिए रखे जाने वाले अतिरिक्त कर्मचारी, पार्किंग पर ड्यूटी देने आदि जैसे कामों के लिए अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति जनभागीदारी शुल्क से ही की जाती है।



शुल्क से किए जाते हैं अतिरिक्त इंतजाम

॥ प्रायवेट विद्यार्थियों के लिए शासन से कोई फंड नहीं मिलता है। विश्वविद्यालय ने 50 रुपए अग्रेषण शुल्क अलग से निर्धारित किया है। परीक्षा के इंतजामों के लिए विश्वविद्यालय से राशि मिलती है जो ड्यूटी करने वाले परीक्षकों सहित दूसरे इंतजामों पर खर्च हो जाती है। प्रायवेट विद्यार्थियों को इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने के लिए 200 रुपए की राशि ली जाती है। यह सभी कॉलेजों में ली जाती है।’

डॉ प्रमोद भारतीय, प्रभारी प्राचार्य शासकीय पीजी कॉलेज नरसिंहगढ़।