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85 फीसदी कारोबारियों ने नहीं कराया पंजीयन
जिले में 18 हजार से ज्यादा कारोबारी खाद्य वस्तुओं का व्यापार करते हैं
कार्यालय संवाददाता - गुना
खाद्य संरक्षा कानून के दायरे में सिर्फ 15 फीसदी ही कारोबारी आ पाए हैं। इस कानून को बने 3 साल पूरे होने को हैं, लेकिन पंजीयन नाममात्र के ही हो सके हैं। इस वजह से अब भी लोगों को गुणवत्ता से समझौता करना पड़ रहा है।
केंद्र सरकार के इस महत्वाकांक्षी कानून का लाभ सीधा जनता को मिलना है। यानी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर पहली बार विक्रेता की जिम्मेदारी तय की गई है। अगर कोई विक्रेता खराब सामग्री बेचता है तो उस पर कार्रवाई करने के अधिकार कानून में दिए गए हैं। इस वजह से सामग्री को बाजार में उतारने वाली कंपनी की भी पूरी जिम्मेदारी होगी।
उसे यह तय करना होगा कि वह जो सामग्री बेच रही है। उसके कोई हानिकारक प्रभाव तो जनता पर नहीं पड़ेगा। खाद्य संरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कारोबारी इस कानून के दायरे में आने से बचने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन ऐसा संभव नहीं है। अगर बिना पंजीयन के सामग्री बेची गई तो कार्रवाई की जाएगी।
4 फरवरी तक मौका
5 लाख का जुर्माना, 6 माह का कारावास
खाद्य संरक्षा अधिकारी मनोज रघुवंशी ने बताया कि बिना पंजीयन व लाइसेंस के कारोबार करने वालों पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना और 6 माह तक के कारावास के दंड का प्रावधान है।
18 हजार हैं खाद्य कारोबारी
जनसंख्या का डेढ़ फीसदी कारोबारी जिले में होने चाहिए। यानी 18 हजार से अधिक संस्थान गुना में संचालित हैं। जबकि सिर्फ 2870 ने ही पंजीयन और लाइसेंस लिया है।
4 बार दिया मौका : अब और मोहलत नहीं
खाद्य पदार्थों के कारोबारियों को कानून के दायरे में आने के लिए 4 मौके दिए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में और छूट नहीं दी जाएगी। केंद्र सरकार के फूड सेफ्टी अथोरिटी द्वारा इससंबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 4 अगस्त 2011 को कानून लागू किया गया था। इसके बाद 4 फरवरी 2012 तक छूट दी गई। पंजीयन फिर भी नहीं हुए। कारोबारियों को फिर 4 अगस्त 2012 तक का समय दिया गया। शासन ने इन्हें कानून के दायरे में आने के लिए 4 फरवरी 2013 तक का फिर समय दिया। लेकिन इसके बाद कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब आखरी मौका दिया है। अगर 4 फरवरी 2014 से पहले-पहले पंजीयन नहीं कराया तो कारोबारियों को दिक्कत पैदा हो सकती है। उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है।
फूड सेफ्टी एक्ट - तीन साल में 15 फीसदी ने ही कराया रजिस्ट्रेशन