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नुकसान का जायजा लेने पहुंच रही टीम

8 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - आष्टा
बुधवार रात को हुई बारिश के साथ चलीं हवाओं ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को आड़ा कर दिया। इसके साथ ही बारिश से सजी के अलावा अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में ओले गिरने के समाचार भी मिले हैं। गुरुवार को प्रशासन के अधिकारियों व कृषि विभाग की टीमें जायजा लेने पहुंचीं।
गौरतलब है कि क्षेत्र में इस वर्ष जनवरी माह की शुरुआत से ही सुबह के समय कोहरे की स्थिति बन रही है। इसके साथ ही पारा गिरने से ठंड भी बढ़ी है। इससे कई फसलों में नुकसान देखने को मिल रहा है। बारिश और हवा के कारण कई किसानों के खेतों में खड़ी गेंहू की फसल पूरी तरह आड़ी हो गई है। गुरुवार को जब कई किसान सुबह अपने खेतों पर पहुंचे तो हैरान रह गए। रात में हुई बारिश और हवाओं से गेंहू की फसल खेतों में बिछ गई।
फसलों को हुआ नुकसान: मावठे के साथ तेज हवाओं से गेंहू, चना, मसुर व मटर के अलावा सभी फसलों में नुकसान देखने को मिल रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान गेंहू व चने की फसल को हुआ है।
उमरदड़ में ४ मिनट तक गिरे ओले: सिद्दीकगंज संवाददाता ने बताया कि गांव उमरदड़ में बुधवार रात को हुई बारिश के साथ तकरीबन ३-४ मिनट तक चने के बराबर ओले भी गिरे। ओलों के गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। गांव के किसान हजारीलाल, पृथ्वी, गुलाब, लीला बाई, दीप सिंह, सेवाराम व हीरालाल ने बताया कि बारिश के साथ गिरे ओलों ने फसल को बर्बाद कर दिया है।
मुआवजे के लिए दिया ज्ञापन: लसूड़लिया विजय सिंह व नानकपुर सहित आसपास के सभी गांवों में शीतलहर व ओलावृष्टि से गेहूं, चने की फसल बर्बाद हो गई है। इसके लिए किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी रवि सिंह को ज्ञापन दिया है। इसमें बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में किसान महेंद्र सिंह ठाकुर, अजब सिंह, धीरज सिंह पटेल, नाथूराम कुशवाह, हुकमचंद कुशवाह, किशोरी, पप्पु धनगर, डॉ. मनोहर सिंह, हमीर सिंह व मिश्रीलाल कुशवाह है।
॥यदि ओलों से फसलों को नुकसान होता है तो मुआवजा मिल सकता है, लेकिन अभी फसलें आड़ी हुई हैं। उसका मुआवजा आरबीसी एक्ट में नहीं है।
रवि सिंह, एसडीएम