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अवैध हथियारों की मंडी बन रहा है गंजबासौदा

8 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - गंजबासौदा
पुलिस की सख्ती के अभाव में शहर अवैध हथियारों का बाजार बनता जा रहा है। दो साल के दौरान ५० से अधिक गोली चलने की घटनाएं प्रकाश में आ चुकी है। पुलिस एक दर्जन के आसपास देसी पिस्तौलें पकड़ चुकी हैं। इसके साथ ही अवैध हथियारों की सप्लाई का रहस्य भी उजागर हुआ है। इसके बाद भी अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त का यह क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है।
हथियारों की खरीद- फरोख्त से शहर सहित पूरे जनपद क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था आपराधिक गतिविधियों की भेंट चढ़ती जा रही है। शहर में अवैध हथियार उत्तरप्रदेश और खंडवा क्षेत्र से लाकर कतिपय लोग बेच रहे हैं।
इसका खुलासा डेढ़़ महीने पहले त्योंदा थानां र्तगत ग्राम घटेरा से देसी कट्टों के साथ पकड़े गए एक व्यक्ति ने किया था। वह बाहर से देसी कट्टे लाकर लंबे समय से बेच रहा था, लेकिन पुलिस ने गिरोह की तह तक पहुंचने के स्थान पर पूरे मामले को दबा दिया। पिछले सप्ताह गोली चलाने की पांच घटनाओं में देसी कट्टों का उपयोग होने के तथ्य सामने आए हैं।
चार साल पहले मिले थे सुराग
चार साल पहले अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले गिरोह का उस समय सुराग लगा था जब कोतवाली में पदस्थ नगर निरीक्षक डीके मिश्रा ने बरेठ रोड चार खंभा गली से एक युवक को देसी कट्टे के साथ पकड़ा था। जब उससे पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला वह अब तक करीब एक दर्जन से अधिक देसी कट्टे लोगों को बेच चुका है। इसके बाद पुलिस ने दो युवकों को पकड़ा था। शहर के बरेठ रोड निवासी दो युवकों को इंदौर के पास पुलिस ने अवैध हथियारों की सप्लाई के सिलसिले में पकड़ा था।
पुलिस ने पल्ला झाड़ा
अवैध हथियार बेचने और भी कई मामले आए लेकिन पुलिस उनकी तह तक नहीं पहुंची। पकड़े गए लोगों पर आम्र्स एक्ट के तहत कार्रवाई करने के बाद पल्ला झाड़कर बैठ गई। यही कारण रहा कि अवैध हथियारों को बेचने का सिलसिला क्षेत्र में थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे शहर अवैध हथियारों के साथ कारतूसों के क्रय और विक्रय का बड़ा बाजार बनता जा रहा है।
देसी कट्टों से हो रही वारदातें
सामाजिक कार्यकर्ता बसंत अग्रवाल का कहना है कि पिछले सप्ताह गोली चलने की पांच घटनाएं सामने आई है। इनमें देसी कट्टों से गोली चलाने की बात प्रकाश में आई है। १९ जनवरी को जले मिल के पास गोली चलने की घटना के बाद पुलिस को तीन कारतूस मौके पर मिले थे। इससे यह बात साफ होती है कि ये कारतूस अवैध कट्टों से ही चलाए गए थे।
नहीं हो पा रही कार्रवाई
शिक्षक नेता घनश्याम अग्रवाल ने बताया कि बढ़ते राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जब भी किसी बाहरी तत्व पर कार्रवाई की जाती है राजनैतिक हस्तक्षेप प्रारंभ हो जाता है। क्योंकि ऐसे तत्व किसी न किसी प्रभावी राजनेता का सहारा लेकर अपने बचाव का रास्ता साफ कर लेते हंै।
त्योंदा पुलिस पर उठे सवाल
विधानसभा चुनाव के दरम्यान त्योंदा पुलिस ने ग्राम घटेरा से अवैध कट्टे के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा था। वह भिंड का रहने वाला था। उस पर क्षेत्र में अवैध हथियार बिक्री का आरोप था। पुलिस ने उस पर मामला तो बनाया, लेकिन उन लोगों पर कार्रवाई नहीं की जिन्हें उसने हथियार बेचे थे।




पकड़े जाएंगे अपराधी

॥अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त मामले में जांच चल रही है। उम्मीद है कि पुलिस को जल्द अवैध हथियारों के कारोबारियों तक पहुंचने में सफलता मिलेगी।

विमल कुमार जैन, एसडीओपी गंजबासौदा।

कालाबाग, लाल पठार, कालीपठार बने अड्डे

सामाजिक कार्यकर्ता शैलेन्द्र सक्सेना का कहना है कि नगर में लाल पठार, कालाबाग, इंद्रानगर, काली पठार ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में बाहर के लोग आकर बस रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में असामाजिक तत्व भी शामिल हैं। ये क्षेत्र बाहर से आने वाले अपराधी तत्वों को छिपने के लिए सुरक्षित अड्डे साबित हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासन ने अब तक ऐसे लोगों को चिन्हित करने का कोई प्रयास नहीं किया है और न ही अभियान चलाया गया है।



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