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अपने भवन में लगेंगी आंगनबाड़ी

8 वर्ष पहले
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रेवाशंकर शर्मा - नसरुल्लागंज

अब किराए के बजाए सरकारी भवनों में आंगनबाड़ी संचालित होंगी। शासन ने नए भवन बनाने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी राकेश शर्मा ने बताया कि बीते कई सालों से आंगनबाड़ी भवन किराए के मकानों, स्कूलों के कमरों और पंचायत भवनों में संचालित हो रहे थे। इस कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

आंगनबाडिय़ों केसंचालन में भी विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व बच्चों को कई प्रकार की परेशानी उठानी पड़ रही थीं। इस समस्या को देखते हुए अब प्रदेश शासन द्वारा द्वारा नवीन भवनों की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। हालांकि अभी ५० प्रतिशत भवनों को निर्माण कार्य तो किया जा सकता है, लेकिन ५० प्रतिशत आंगनबाड़ी भवनों के लिए स्थान के लिए शासन को लिखा गया है। जैसे ही स्थान उपलध होता है, शेष आंगनबाडिय़ां भी बन जाएंगी।

क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र

तहसील क्षेत्र में इस समय २३४ बड़ी व २४ मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन कें द्रों में दर्ज ६ माह से ६ साल तक के कुल बच्चों की संया २३ हजार ७७४ है। साथ ही धात्री महिलाएं २६६५, गर्भवती महिलाएं २१७८ दर्ज हैं।



यह मिलेंगी अब सुविधाएं

नगर में तीन करोड़ की लागत से बनने वाले २० नवीन आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण होना है। एक आंगनबाड़ी का निर्माण १५ लाख रुपए से किया जाएगा। इनमें बच्चों को बैठने की समुचित व्यवस्था, पढऩे के लिए क्लास रूम, पोषण आहार रखने के लिए स्टोर रूम, खेलकूद के कक्ष के अतिरिक्त मीटिंग हाल व मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए रसोई घर का भी निर्माण कार्य किया जाएगा।

बच्चों को भी मिलेगा सुरक्षित स्थान

कंडम आंगनबाड़ी भवनों में पहुंचने वाले ६ माह से ६ साल तक के बच्चों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बारिश के समय इन बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने की भी सूखी जगह नहीं मिल पाती थी। इसके चलते केंद्र की कार्यकर्ता व सहायिकाओं को बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार का वितरण उनकेघर जाकर ही करना पड़ता था।

भवनों के अभाव में परेशानी

भवनों के अभाव में विभाग को अनेक सालों से किराए के मकान, शासकीय पंचायत भवन व ग्रामीण क्षेत्रों में झोपडिय़ों के सहारे आंगनबाडिय़ों का संचालन करना पड़ता था।

इसके अलावा जहां पर भवन उपलध नहीं थे, वहां आंगनबाड़ी संचालन की औपचारिकताएं कार्यकर्ता को अपने घर से ही करनी पड़ती थीं। भवनों के अभाव में विभाग द्वारा बच्चों को भेजे जाने वाला पोषण आहार भी सुरक्षित नहीं रहता था। खासतौर से बारिश के मौसम में पोषण आहार खराब हो जाता था। नवीन भवनों के बनने के बाद इन समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा।



नसरुल्लागंज. किराए के कंडम भवनों में इस प्रकार चल रहीं आंगनबाड़ी।

ञ्चबच्चों को भी होती है किराए के भवनों में कई तरह की परेशानियां

ञ्चपचास प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन के लिए नहीं जगह





हालात - कई सालों से किराए के भवनों में लग रही थी आंगनबाड़ी