सनातन धर्म शाश्वत है
बेगमगंज - वेदों को किसी ने लिखा नहीं है, वह परमात्मा का ही रूप है। परमात्मा की श्वास से निकला है। वेदों में शब्द ब्रह्य तथा सूत्रात्मक व्याख्या है, पर रामजी का चरित्र वेदों की प्रायोगिक व्याख्या है, इसलिए जो रामजी ने कह दिया, वही वेद है अत: मानस भी वेदों की भांति पुण्य प्राप्त कराता है।
ये विचार जनपद पंचायत के मैदान में 19 वें श्रीरामचरित मानस सम्मेलन के पहले दिन मानस व्याख्याता आचार्य डॉ.रामाधार शर्मा ने कथा का वाचन करते हुए व्यक्त किए। महावीर दास ब्रह्मचारी ने कहा कि प्रारब्ध बिगड़ता है तो उनकी दृष्टि में सनातन के प्रति अश्रद्धा हो जाती है।
झांसी के राजेन्द्र पाठक ने कहा कि राम की तरह आचरण करने में ही मानवता है। 27 से 31 जनवरी तक चलने वाले मानस सम्मेलन में व्यख्याताओं का व्याख्यान दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक एवं रात्रि आठ से 10 बजे तक चलेगा।