एनओसी में अटका विकास
कार्यालय संवाददाता - रायसेन
शहर के लोगों की समस्याएं विभागीय तालमेल की कमी से ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। चाहे सड़कों का निर्माण हो या नगर का सौंदर्यीकरण। इसी तरह फुटपाथ की सुविधा हो या जल आवर्धन योजना, सभी में विभागीय एनओसी रोड़ा बनी हुई है। ऐसे में शासन द्वारा मंजूर सभी विकास कार्य अधर में पड़े हुए हैं। नागरिक भी लंबे समय से इन योजनाओं के पूरा होने की आस लगाए बैठे हैं।
शहर में लंबे समय से सड़कों की हालत खस्ता है। इस कारण यातायात भी प्रभावित होता रहता है। लंबे समय बाद प्रशासन ने इस समस्या की तरफ ध्यान दिया और सड़कों के विकास के लिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के तहत १० करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। इस योजना के तहत सड़क निर्माण के साथ ही फुटपाथ भी तैयार कराया जाना था। वहीं सड़कों पर लाइटें व चौराहों का सौंदर्यीकरण भी शामिल किया गया था। इसके बाद नागरिकों ने शहर के विकसित स्वरूप की कल्पना करना शुरू कर दी थी, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी योजना का क्रियान्वयन शुरू नहीं हो सका है। नपा अधिकारी काम शुरू न होने का मुख्य कारण राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग द्वारा एनओसी न मिलना बता रहे हैं। ऐसे में एनओसी के बगैर कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।
पाइप लाइन में भी समस्या
शहर के लोगों की प्यास बुझाने के लिए ३३ करोड़ रुपए की लागत से हलाली डेम से पानी लाया जाना है। पानी को स्टोर करने के लिए ईदगाह के पीछे वाटर प्लांट तैयार किया जा रहा है, वहीं पानी सप्लाई के लिए डेम से शहर तक पाइप लाइन बिछाई जाना है। लाइन बिछाने के कार्य में बड़ी देरी हुई है। अब कम से कम एक साल तक तो नागरिकों को इस योजना के लाभ के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
स्वच्छता की कवायद में देरी:
मुख्यमंत्री स्वच्छता मिशन द्वारा शहर में १००० टॉयलेट तैयार कराए जाने हैं। इसके तहत १३ हजार ५०० रुपए की लागत से एक टायसेट तैयार की जाएगी। इसके लिए आवेदक को १० प्रतिशत मार्जिन राशि जमा कराना होगी, लेकिन अभी तक टॉयलेट का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
मैदान का होना है उद्धार
रामलीला मैदान में समतलीकरण कराकर बाउंड्रीवाल तैयार कराई जाना है, जिससे मैदान का सौंदर्यीकरण हो सके। इसके साथ ही दुकानें भी तैयार कराई जाएंगी। वहीं पुराने बस स्टैंड पर शॉपिंग मॉल का भी निर्माण कराया जाना है। ये सभी विकास कार्य एक वर्ष पहले से स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अभी तक अधर में अटके हुए हैं।