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- ञ्चबिल ठीक कराने बिजली कार्यालय के लगा रहे चक्करञ्चशिकायत पर नहीं की जाती है कोई सुनवाई
ञ्चबिल ठीक कराने बिजली कार्यालय के लगा रहे चक्करञ्चशिकायत पर नहीं की जाती है कोई सुनवाई
कार्यालय संवाददाता - आष्टा
बिजली कंपनी की मनमानी ने उपभोक्ताओं को परेशानी में डाल रखा है। नगर में आंकलित खपत के नाम पर उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूली जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं की पीड़ा भी कम नहीं है। अनेक उपभोक्ताओं के घरों पर बिजली मीटर ही नहीं लगे हैं, लेकिन मनमाने एवरेज बिल दिए जा रहे हैं। शिकायत के बावजूद भी बिजली कंपनी के अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के बिजली उपभोक्ता इस समय एवरेज बिलों को लेकर काफी परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में २४ घंटे बिजली प्रदाय नहीं हो रहा है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को अनुमानित खपत जोड़कर एवरेज बिल पहुंचाएं जा रहे हैं। इसके संबंध में ग्रामीण उपभोक्ताओं के सब स्टेशनों पर पहुंचने पर अधिकारी वरिष्ठ कार्यालय से बिल आने का कहकर उन्हें लौटा देते हैं। वरिष्ठ कार्यालय आष्टा के अधिकारी भी उपभोक्ताओं के बिलों की समस्या का हल नहीं करते हैं। इसके कारण उनकी परेशानी बढ़ जाती है। इसके कारण ग्रामीण परेशान हैं।
आने पर लगाए जाते हैं बिजली मीटर
॥ अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली मीटर की कमी है, लेकिन मीटर आने पर उपभोक्ताओं को मीटर लगाने की व्यवस्था की जाती है।
डीबी वाष्र्णेय, डीई, बिजली कंपनी
बकाया राशि वसूलने बिजली की अघोषित कटौती जारी
ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं से बकाया राशि वसूलने के लिए कंपनी ने बिजली काटना भी शुरू कर दी है। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी उठाना पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि फसल आने पर ही हमारे पास रुपए आते हैं। इसके बावजूद कंपनी बकाया वसूलने लाइन काट रही है।
कर्मचारियों के प्रति आक्रोश
बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही व मनमानी का खामियाजा सब स्टेशनों के अधीनस्थ कर्मचारियों को झेलना पड़ता है। ऐसा ही मामला पिछले दिनों मेहतवाड़ा गांव में देखने को मिला था। बिना मीटर के खपत का आंकलन आष्टा-जावर तहसील मिलाकर करीब ५९ हजार ग्रामीण बिजली उपभोक्ता हैं। कंपनी ने उपभोक्ताओं की संख्या के मान से गांवों में बिजली के मीटर नहीं लगाए हैं। यदि सूत्रों की माने तो 2० प्रतिशत उपभोक्ताओं के घरों में मीटर नहीं लगे हैं। जबकि बिजली कंपनी हर माह मनमाने एवरेज बिल उपभोक्ताओं पर थोप देती है।
हर माह ग्रामीणों को एवरेज बिल
बिजली कंपनी द्वारा हर माह एवरेज बिल ग्रामीण उपभोक्ताओं को थमाए जाते हैं। इसमें मनमानी राशि के चलते ग्रामीणों पर बिलों की राशि का बोझ बढ़ता चला जाता है। गांवों में अधिकांश लोग फसलों पर ही निर्भर रहते हैं। इससे बिलों की राशि बढ़कर हजारों में पहुंच जाती है। जब उपभोक्ता बिलों की राशि का भुगतान नहीं कर पाता है तो ग्रामीणों के सामान की कुर्की की कार्रवाई कर दी जाती है। ग्रामीण इस समस्या से काफी परेशान हो गए हैं।
बिजली मीटर लगाने नहीं की जाती सुनवाई
उपभोक्ताओं द्वारा बिजली कनेक्शन लेते समय बिजली मीटर लगाने के लिए कहा जाता है, लेकिन कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी मीटर आने पर लगाने का कहकर टाल देते हैं। टांडा के भादर सिंह, कैलाश मालवीय, चुपाडिय़ा के कमल सिंह ने हाल ही में नए कनेक्शन लिए हैं। इन्होंने बताया कि लाइनमेन से अनेक बार मीटर लगाने का कहा गया, लेकिन मीटर नहीं लगाए गए। इसके कारण उन्हें एवरेज बिजली के बिल दिए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
चोरी हुई बिजली की भी कंपनी कर रही भरपाई
गांव में ट्रांसफार्मर से जाने वाली लाइन से अवैध रूप से तार के हुक डालकर चोरी की जाती है। जब बिजली की खपत जोड़ी जाती है। चोरी हुई बिजली का बोझ भी गांव के कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं पर पड़ता है। खपत को इन उपभोक्ताओं में बांटकर एवरेज बिल दिए जाते हैं।इस माह भी भरना पड़ी पेनाल्टी बिजली कर्मचारियों की लापरवाही के चलते पिछले कई महीनों से नगर के उपभोक्ताओं को अंतिम तिथि के एक या दो दिन पहले बिल मिल रहे हैं। इस माह भी बिजली बिल जमा कराने की अंतिम तिथि २१ जनवरी थी, लेकिन उपभोक्ताओं को बिल १९-२० तारीख को मिले। इससे बिजली कार्यालय में उपभोक्ताओं को लंबी कतार में खड़ा होकर बिल जमा करना पड़ा। इसमें कई उपभोक्ताओं के बिल जमा नहीं होने के कारण उन्हें पेनॉल्टी भी भरना पड़ी।
आष्टा. कर्मचारियों की लापरवाही के चलते बिजली बिलों का वितरण देरी से होने पर संशोधन के लिए लगी भीड़।
बिना मीटर एवरेज बिलों का बोझ
परेशानी - ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कंपनी द्वारा कनेक्शन देने के बाद भी नहीं लगाए जाते मीटर