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ञ्चतीन कक्षाओं के लिए नगर के स्कूलों में 12 से 15 शिक्षक जुटे हैं पढ़ानेञ्चगांवों के कई ऐसे स्कूल जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षकों का सहारा
बलजीत सिंह ठाकुर - सीहोर
मिडिल स्कूलों की तीन कक्षाओं में बच्चों की संख्या तो ढाई सौ पार नहीं हो पाई लेकिन पढ़ाने वालों की नगर के स्कूलों में कोई कमी नहीं है। इन बच्चों को पढ़ाने वालों की संख्या को देखते ही हैरत होती है। कहीं पर 12 तो कहीं पर 15 शिक्षक इन बच्चों को पढ़ाने के लिए रख रखे हैं जबकि गांवों के स्कूलों में 120 बच्चों के लिए केवल दो-दो शिक्षक। ऐसे में भला कैसे रिजल्ट सुधारने की कवायद पूरी हो पाएगी। जिला मुख्यालय में एक-दो नहीं बल्कि अधिकतर शासकीय स्कूलों में बच्चों की संख्या के अनुपात से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं।
शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जिला शिक्षा विभाग के अलावा जिला प्रशासन भी जुटा हुआ है। खुद कलेक्टर कवींद्र कियावत भी कई स्कूलों में जाकर बच्चों को बेहतर अंक अर्जित करने के लिए टिप्स बता चुके हैं। लेकिन इस तरफ इन जिम्मेदारों का ध्यान भी नहीं गया कि जिला मुख्यालय के शासकीय स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों की संख्या के अनुपात से ही शिक्षकों की नियुक्ति होना चाहिए लेकिन जब जिला मुख्यालय पर ही नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है तो बाकी जगह क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगर के आसपास के स्कूल
जिला मुख्यालय से दो किमी दूर स्थित प्राइमरी स्कूल गोपालपुरा में 27 व आवंतीपुरा में 24 बच्चों के लिए दो-दो शिक्षक, मिडिल स्कूल सेवनिया के 85 व सेवनिया के 83 बच्चों के लिए 4-4, शाहपुर कौडिय़ा मिडिल स्कूल के 51 विद्यार्थियों के लिए 3 और प्राइमरी स्कूल के 61 छात्र-छात्राओं के लिए दो शिक्षक पदस्थ हैं।
॥तीस छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था होगी। जहां अतिशेष शिक्षक हैं उन्हें कमी वाले स्कूलों में युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। ऐसे शिक्षकों को चिन्हित किया जा रहा है।
डीके शर्मा, डीईओ
कई स्कूलों की हालत अधिक खराब
चांदबड़ जागीर प्राइमरी स्कूल: 65 दर्ज छात्र-छात्राओं के लिए एक ही शिक्षक है। एक अतिथि शिक्षक रखा गया है। इसी तरह मिडिल स्कूल के 101 छात्रों के लिए एक शिक्षक एक अतिथि शिक्षक, हाई स्कूल में 64 विद्यार्थियों के लिए भी एक शिक्षक और दो शिक्षिकाएं हैं। पीलूखेड़ी हाई स्कूल में 51 और हसनपुर तिनोनिया में 60 विद्यार्थियों के लिए एक-एक शिक्षक ही है। यहां पर भी एक-एक अतिथि शिक्षक हैं। नगरीय क्षेत्रों में तो राजनैतिक रूप से प्रभावशाली कई शिक्षक सालों से जमे हुए हैं लेकिन इन्हें कोई यहां से हटा नहीं पाता है। जब भी इन पर कोई कार्रवाई होती है तो यह अपनी पहुंच का फायदा उठाकर यहां से अपना तबादला रुकवा लेते हैं।
मगरदा हाई स्कूल के 45 छात्र-छात्राओं के लिए एक अतिथि शिक्षक ही है। गड़ी बगराज हाई स्कूल के 47 व मिडिल के 101 छात्र-छात्राओं के लिए केवल एक-एक शिक्षक है। यहां पर भी अतिथि शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है।
श्यामपुर. गड़ी बगराज के स्कूल में एक ही शिक्षक है।
गांवों के स्कूलों में नहीं पढ़ाने वाले
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति काफी खराब है। यहां पर बच्चे तो हैं लेकिन पढ़ाने वालों का टोटा है। गांवों के स्कूलों में शिक्षक जाना ही नहीं चाहते हैं। इन स्कूलों में जाकर देखा तो स्थिति कुछ इस तरह की थी।
चरनाल हाई स्कूल: 120 छात्र-छात्राओं के लिए दो शिक्षक और तीन अतिथि शिक्षक, मिडिल स्कूल के 122 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक व दो अतिथि शिक्षक हैं।
बांसिया मिडिल और हाई स्कूल: यहां पर 154 छात्र-छात्राएं दर्ज हैं। शिक्षक दो ही हैं। अतिथि शिक्षक रखकर पढ़ाई कराई जा रही है।
एक शिक्षक के भरोसे रहता है कई बार स्कूल
कई स्कूलों की हालत इस कदर खराब है कि यहां के बच्चों की पढ़ाई का स्तर कैसे सुधर पाएगा, यह समझ से परे है। मंगलवार को प्राइमरी स्कूल अवंतीपुरा की सभी कक्षाओं को यहां पदस्थ शिक्षिका अनिता कुशवाह पढ़ा रही थीं। यहां के प्रभारी बहादुर सिंह नरोला स्कूल में नहीं थे। यही हाल प्राइमरी स्कूल सेवनिया के थे। यहां पर भी मंगलवार को बच्चे तो अपनी कक्षाओं में बैठे थे लेकिन इन्हें पढ़ाने वाले ही नहीं थे। एक शिक्षिका ही स्कूल में थीं। बाकी तीन शिक्षक अवकाश पर थे।
क्षेत्र के स्कूलों की हालत
शासकीय प्राइमरी टैगोर स्कूल: दर्ज बच्चों की संख्या 84 है लेकिन इन्हें पढ़ाने वाले 5 शिक्षक तैनात किए गए हैं।
शासकीय मिडिल टैगोर स्कूल: छात्र संख्या 219 लेकिन पढ़ाने वाले 12 शिक्षक। इतने अधिक शिक्षक यहां क्या कर रहे हैं, समझ से परे है।
शासकीय एमएलबी प्राइमरी स्कूल: 119 छात्राओं को पढ़ाने के लिए 5 शिक्षिक-शिक्षिकाएं।
शासकीय एमएलबी मिडिल स्कूल: तीन कक्षाओं छह से आठवीं तक 243 छात्राएं इस स्कूल में पढ़ती हैं। इन्हें पढ़ाने वालों की संख्या यहां पर भी 12 है।
शासकीय एमएलबी हाई स्कूल: 693 छात्राओं को पढ़ाने के लिए 25 शिक्षक-शिक्षिकाओं का स्टाफ यहां पर पदस्थ है।
शासकीय सुभाष स्कूल: यहां पर प्राइमरी स्कूल के 81 छात्रों के लिए 3 शिक्षक, 115 मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए 9 और हायर सेकंडरी स्कूल में पढ़ रहे 515 छात्रों के लिए 24 शिक्षक पदस्थ हैं।
कस्तूरबा स्कूल की स्थिति: यहां के प्राइमरी स्कूल के 165 छात्र-छात्राओं के लिए 7, मिडिल स्कूल के 281 विद्यार्थियों के लिए 15 शिक्षक-शिक्षिकाएं पढ़ाते हैं। इसी तरह हायर सेकंडरी स्कूल के 394 विद्यार्थियों के लिए 15 शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं।
सीहोर. इस तरह नगर के टैगोर स्कूल में एक कक्षा को चार-चार शिक्षिकाएं घेरकर बैठी हुई हैं।
गांव में कमी, नगर में भरमार
हालात - कहीं स्कूल चल रहे अतिथियों के भरोसे, कहीं एक ही शिक्षक संभाल रहा पूरा स्कूल