१२६० गांव लेकिन खेल मैदान सिर्फ 44 बने
योजना शुरू होने के चार साल बाद भी ४४ ग्रामों में विकसित हुए ग्राउंड
कार्यालय संवाददाता - गुना
ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के लिए शुरू की गई ग्रामीण क्रीडांगन उपयोजना जिले में फ्लॉप साबित हो रही है। योजना लागू होने के ४ साल बाद भी गांवों में खेल मैदान नहीं बन पाए हैं। इससे ग्रामीण युवा अपनी प्रतिभा को उभार नहीं पा रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत सितंबर 2009 में ग्रामीण क्रीडांगन उपयोजना शुरू की थी। योजना के तहत जिले की 425 पंचायतों के सभी 1260 गांवों में एक- एक खेल मैदान विकसित किए जाने थे, लेकिन कुछेक गांवों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर में अभी तक खेल मैदान नहीं बन सके हैं।
‘एक पंथ, दो काज’ थी मंशा : पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा में ‘एक पंथ और दो काज’ की तर्ज पर उक्त योजना को आरंभ किया था। विभाग का मकसद था कि मनरेगा में ग्रामीणों से योजना के जरिए भूमि सुधार के कार्य कराकर उन्हें रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के शुरुआती दौर में उन्हें गांव में खेल मैदान बनने थे, जहां पहले से सरकारी स्कूल है। ताकि इस मैदान को तैयार करने में ग्रामीणों को भी रोजगार मुहैया कराया जा सके।
सिर्फ ४४ गांवों में बने ग्राउंड
योजना लागू हुए भले ही चार साल बीत चुके हो, लेकिन अभी तक जिले में सिर्फ ४४ ही खेल मैदान विकसित हो पाए हैं। हालांकि ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी खेल नहीं बनने के पीछे की वजह गांवों में स्कूलों के पास पर्याप्त मात्रा में जमीन उपलब्ध नहीं होना बता रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में जिला पंचायत ने जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के तहत तमाम गांवों में दो सैकड़ा खेल मैदान तैयार करने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन इसके बावजूद भी यह रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
॥कई स्कूलों के पास जमीन नहीं है, जिससे खेल मैदान बनने में दिक्कत आ रही है। हमने ग्राम पंचायतों को ज्यादा से ज्यादा मैदान विकसित कराने के निर्देश दिए हैं। इस वार दो सौ का लक्ष्य रखा है। पूरा कराएंगे।ञ्जञ्ज
शेखर वर्मा, सीईओ जिला पंचायत गुना