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- ञ्चपिछले कई सालों से डॉक्टर समय पर नहीं आते अस्पतालञ्चमरीजों को कराना पड़ता है बाहर जाकर इलाज
ञ्चपिछले कई सालों से डॉक्टर समय पर नहीं आते अस्पतालञ्चमरीजों को कराना पड़ता है बाहर जाकर इलाज
रेवाशंकर शर्मा - नसरुल्लागंज
नगर का सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र को धनवंतरी अस्पताल का दर्जा प्राप्त है, लेकिन पिछले कई सालों से इसके हाल बे-हाल हैं। हालत यह है कि डॉक्टरों की मनमानी के चलते मरीजों को अपना इलाज कराने में भी कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। इसकी मुख्यमंत्री तक भी शिकायतें की गर्ईं, लेकिन लापरवाह डॉक्टरों में सुधार नहीं हो रहा है।
इन दिनों अपना इलाज कराने आने वाले मरीजों को कड़कड़ाती ठंड में अस्पताल परिसर में बैठकर प्रतिदिन डॉक्टरों के आने का इंतजार करना पड़ता है। महिला मरीजों को तो आज तक समय पर उपचार की सुविधा नहीं मिल सकी है। बुधवार को दैनिक भास्कर द्वारा सुबह अस्पताल पहुंचकर लाइव कवरेज किया गया तो इस तरह के नजारे देखने को मिले। सुबह ८ बजे अपनी ड्यूटी पर आने वाले डॉक्टर १०.३० बजे तक अस्पताल नहीं पहुंचे थे। इस दौरान अज्ञपताल में मरीजों की भीड़ लगने लगी थी। अस्पताल में मुफ्त उपचार समय पर न मिलने के कारण क्षेत्र के मरीजों को प्रतिदिन गंभीर स्थिति के चलते नगर में प्रायवेट डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है।
फैक्ट फाइल
> स्थिति: अस्पताल को धनवंतरी स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा
> निर्भर: ५० गांवों के मरीज रहते हैं इस अस्पताल पर निर्भर
> सर्वाधिक बीमारी: सर्दी, जुखाम, उल्टी, बुखार, हाथ पैरों में दर्द
> पदस्थ डॉक्टर ७, उपस्थित थे ३
> खुलने का समय: सुबह ८ बजे से दोपहर एक बजे, शाम ५ बजे से शाम ६ बजे
> परेशानी: रात के समय नहीं रहते यहां पर डॉक्टर
एक सप्ताह में ३५ सौ मरीजों का पंजीयन
बीते एक सप्ताह में स्वास्थ्य केंद्र में लगभग ४ हजार मरीजों का पंजीयन किया गया, लेकिन डॉक्टरो के नहीं मिलने से कई मरीत वापस लौट गए या फिर उन्हें प्रायवेट डॉक्टरों के यहां जाकर इलाज कराना पड़ा।
जिम्मेदारों ने कहा नहीं मिलती फुरसत
सुबह १०.३० बजे के बाद अपने चेंबर में आने के बाद बीएमओ डॉ. मुकीम अहमद ने बताया कि उन्हें कार्यालयीन कार्यों से ही फुरसत नहीं मिलती है। डॉक्टर जाटव कोर्ट पेशी पर गए हैं, डॉ. एसके ढोबले विकलांग शिविर में लगे हुए हैं और डॉ. मनीष सारस्वत पोस्टमार्टम कर रहे हैं। डॉ. केसी दुबे भोपाल से आने वाले हैं। महिला डॉक्टर भी आती होंगी। इसके अलावा डॉ. आरसी विश्वकर्मा सुबह १०.५० बजे अपने केबिन में आकर बैठे।
परेशानी मरीजों की जुबानी
केस नंबर- १
दो घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रहा हूं। मेरे बेटे को रात से ही बहुत उल्टियां हो रही हैं। सुबह के १०.३० बज चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई डॉक्टर नहीं आया है।
अमर सिंह कुशवाह, गांव हाथीघाट
केस नंबर- २
मैं अपनी तीन माह की बच्ची को लेकर आई हूं। इसे दो दिन से खांसी हो रही है व सांस की बीमारी है। ठंड बहुत है और डॉक्टरों का सुबह १०.३० तक कोई पता नहीं है जबकि अस्पताल ८ बजे ही खोल दिया गया।
शबीना बी, गांव पीपलकोटा
केस नंबर-३
मैं सुबह आठ बजे से डॉक्टरों का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन यहां सुबह ९.३० बजे तक तो सफाईकर्मी डॉक्टरों के केबिन की झाडू लगा रहे थे। ऐसे में 11 बजे के पहले तो मेरी बेटी का उपचार नहीं हो सकेगा। उसे बहुत तेज बुखार है।
गणेश यादव, शिक्षक नसरुल्लागंज
केस नंबर-४
॥मेरी बहू की रात को डिलेवरी होने के बाद बच्ची का रात ८ बजे से पेट फूल रहा है और उल्टी हो रही है। तभी से ही डॉक्टरों के आने का इंतजार कर रहा हूं। सुबह 10.30 बजे तक एक भी डॉक्टर नहीं आया है।
राधेश्याम बारेला, गांव लाड़कुई
नसरुल्लागंज. सुबह ११ बजे से शुरूहुआ मरीजों के इलाज का सिलसिला।
नसरुल्लागंज. बुधवार को सुबह १०.४० बजे डॉक्टर व कर्मचारी धूप में खड़े हुए।
नसरुल्लागंज. डॉक्टरों का इंतजार करते इस तरह मरीज।
नसरुल्लागंज. बुधवार को सुबह १०.४० बजे तक अस्पताल में नहीं पहुंचे थे डॉक्टर।
नजारा
अस्पताल खुला सुबह ८ बजे। इस दौरान सफाईकर्मी सुबह १०.३० बजे तक सफाई करते रहे।
अस्पताल में बीएमओ सुबह १०.४० तक अपने कार्यालय में बैठकर कार्यालयीन कार्यों में ही व्यस्त नजर आए।
दो दर्जन से अधिक मरीज सुबह १०.३० बजे तक डॉक्टर के आने का इंतजार करते नजर आए।
एक डॉक्टर विकलांग शिविर में, एक न्यायालय में पेशी करने, एक डॉक्टर भोपाल से नहीं आए तो एक डॉक्टर पोस्ट मार्टम करने में लगे थे।
महिला डॉक्टर का सुबह १०.४५ बजे तक कोई पता नहीं था। इस दौरान महिला मरीज उनके इंतजार में बैठी रहीं।
अस्पताल में दवाएं न होने से मरीजों को लेना पड़ी बाजार की दवाएं।
मनमानी का कब होगा इलाज
हालात - शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ सुधार, मरीज होते हैं हर रोज परेशान