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- ञ्च13 सालों से दोनों नगर पालिकाओं पर बकाया है राशिञ्चकई बार दिए गए नोटिस लेकिन नहीं हुआ असर
ञ्च13 सालों से दोनों नगर पालिकाओं पर बकाया है राशिञ्चकई बार दिए गए नोटिस लेकिन नहीं हुआ असर
कार्यालय संवाददाता - सीहोर
हर साल पेयजल संकट का हवाला देते हुए नगर पालिकाएं सिंचाई विभाग के तालाबों से पानी तो ले लेती हैं लेकिन इसके बाद इस पानी के लिए अदा की जाने वाली राशि को जमा नहीं कराया जाता है। हालत यह हो गई है कि धीरे-धीरे यह राशि बढ़ती चली गई और अब सीहोर व आष्टा नगर पालिकाओं से सिंचाई विभाग को 7 करोड़ की राशि वसूल करना है।
गर्मी के मौसम में हर साल सीहोर व आष्टा नगर में पानी की किल्लत होने लगती है। सीहोर में नगर पालिका जमोनिया तालाब से जहां पानी सप्लाई करती है तो वहीं भगवानपुरा तालाब के पानी को सीवन नदी को भरने के लिए छोड़ा जाता है। अब इस तालाब के पानी को भी सप्लाई करने के लिए फिल्टर प्लांट बनाया जा रहा है। इस तरह इन दोनों तालाबों के पानी का उपयोग नगर की पेयजल व्यवस्था के लिए होता है।
सीहोर नपा को देना हैं पौने पांच करोड़ रुपए
सीहोर नगर पालिका को सिंचाई विभाग के 4 करोड़ 73 लाख 33 हजार रुपए जमा कराने हैं। इसमें इस साल का 60 लाख 19 हजार रुपए भी इसमें शामिल है। यह राशि अभी तक नगर पालिका जमा नहीं कर पाई है। इसी तरह आष्टा नगर पालिका की भी यही हालत है। आष्टा नगर पालिका भी नगर के पेयजल संकट को लेकर रामपुरा डेम से पानी रिजर्व कराती है। इस पानी को पार्वती नदी में छोड़ा जाता है और फिर आष्टा में बने बंधान को पानी से भरा जाता है।
इस पानी को छोडऩे के नगर पालिका को सिंचाई विभाग के 1 करोड़ 93 लाख 96 हजार रुपए पुराने देना है। जबकि इस साल के लिए 26 लाख 40 हजार की राशि देना होगी। आष्टा नपा को कुल 2 करोड़ 20 लाख रुपए देना है जिसमें से अभी एक भी रुपया नहीं चुकाया है।
शहर के लिए रिजर्व है जल
हर साल एक तो कभी दो लाख करते है जमा
नगर पालिकाओं की स्थिति यह है कि यह हर साल पेयजल आरक्षित कराने के नाम पर नाममात्र की राशि जमा करा देती हैं। इसके बाद जब जल संकट का समय आता है तो दवाब बनाकर पानी छुड़वा लिया जाता है। पूरी राशि कभी भी जमा नहीं की गई।
अनुबंध करने पर बचेगा नुकसान
सिंचाई विभाग नगर पालिकाओं से अनुबंध करने के लिए कई बार पत्र जारी कर चुका है। लेकिन इसके लिए शर्त यह होती है कि नगर पालिकाओं पर बकाया राशि नहीं होना चाहिए, तभी अनुबंध हो सकता है। यदि अनुबंध हो जाए तो जो अतिरिक्त दर से भुगतान करना होता है, उससे बचा जा सकता है। अभी सिंचाई विभाग अनुबंध नहीं होने की दशा में तीन गुना वर्तमान दर से शुल्क तय करता है। इसी कारण हर साल काफी अधिक राशि नगर पालिकाओं के खातों में जुड़ जाती है।
इतना पानी रिजर्व कराया
जमोनिया और भगवानपुरा तालाब से पानी सप्लाई करने के लिए यहां पर फिल्टर प्लांट बना दिए गए हैं। जमोनिया तालाब पर फिल्टर प्लांट बना दिया गया था और अब वहां से प्रतिदिन पानी सप्लाई किया जाता है। जब यह योजना बनाई गई थी तभी शासन स्तर से जमोनिया और भगवानपुरा तालाबों के पानी को रिजर्व करा दिया गया था। इस नियम में हर साल जमोनिया में 3.10 और भगवानपुरा तालाब में 2.56 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी आरक्षित किया जाएगा।
नोटिस का भी नहीं होता असर
दोनों नगर पालिकाओं की स्थिति एक जैसी है। जब भी पानी चाहिए तो जल संकट और आमजन से जुड़ा मुद्दा होने का हवाला देकर पानी ले लिया जाता है। यदि सिंचाई विभाग बकाया राशि जमा करने के लिए कहे तो कभी जिला प्रशासन तो कई बार जनप्रतिनिधियों का सहारा भी ले लिया जाता है। पेयजल संकट से निपटने के लिए पानी ले लिया जाता है लेकिन जब सिंचाई विभाग राशि जमा कराने के लिए नोटिस जारी करता है तो आनाकानी की जाती है।
धीरे-धीरे बढ़ती जा रही बकाया राशि
वर्ष 2001-02 की बात करें तो उस समय सीहोर और आष्टा नगर पालिकाओं पर यह राशि बहुत कम थी। उस समय आष्टा नगर पालिका को 50 हजार 614 रुपए ही देना थे जबकि सीहोर नगर पालिका के ऊपर भी बहुत कम बकाया राशि थी। यह राशि 4 लाख 48 हजार रुपए थी। इस राशि को जमा कराने के लिए नोटिस भी जारी किए गए लेकिन नगर पालिकाओं पर इनका कोई असर नहीं हुआ। हालत यह हो गई कि यह हजारों व लाखों की राशि अब करोड़ों में पहुंच गई।
सीहोर. सीहोर नगर पालिका ने जमोनिया तालाब के पानी को आरक्षित कराया है। यहां से नगर के लिए प्रतिदिन पानी की सप्लाई की जाती है।
नहीं चुकाई पानी की कीमत
मनमर्जी - सीहोर और आष्टा नगर पालिकाओं ने पानी तो ले लिया लेकिन नहीं चुकाई राशि