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गेहूं दमका, चने को नुकसान

7 वर्ष पहले
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रायसेन। जनवरी में कई बार गिरे मावठे के बाद धूप निकलने से फसलों को मिला फायदा।

कराया जा रहा बर्बादी का सर्वे

॥इस बार हुई मावठे की बारिश से गेहंू का उत्पादन बढऩे की संभावना है, जबकि बारिश और ओलावृष्टि से चने का फूल झड़ गया है। चने में उत्पादन गिरने की संभावना है। कहीं-कहीं पर अन्य फसलों को ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। उसका सर्वे कराया जा रहा है। ञ्जञ्ज

जेपी गुप्ता, सहायक संचालक कृषि रायसेन

मावठे ने पूरी कर दी गेहूं की फसल में सिंचाई की आवश्यकता

देहगांव के किसान मिश्रीलाल मीणा का कहना है करीब 70 फीसदी गेहूं में बालियां आने लगी हैं। ऐसे में तेज हवाओं से जो गेहूं जमीन पर बिछ गए थे उन पर भी प्रभाव रहेगा। रंग भी हल्का हो सकता है। चने की उस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जहां पर लावरिंग यानी फूल आने लगे थे। कोहरे-धुंध और तेज हवाओं से फूल गिर गए हैं। ग्राम भादनेर के किसान सचिन यादव का मानना है कि रबी की फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है। मावठे की बारिश ने उसकी पूर्ति कर दी है, परंतु ज्यादा बारिश होने से खेतों में गेहंू की फसल आड़ी हो गई थी, जिससे २० से ३० प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। फिर भी मावठे की यह बारिश गेहूं के लिए फायदेमंद है। समय-समय पर पानी मिलने से गेहंू का उत्पादन १५ से २० प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

किसानों ने मसूर की फसल में नहीं दिखाई रुचि

जिले के किसानों ने इस बार मसूर की बोवनी करने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। पिछले साल किसानों ने ३० हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मसूर की बोवनी की थी, लेकिन इस बार मात्र १८ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही बोवनी की गई है। यह फसल भी लगातार हुई बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इस कारण मसूर का उत्पादन बहुत कम होने की बात कही जा रही है।



ञ्चबारिश और ठंड से गेहूं को फायदा, चने को पहुंचा नुकसान



मौसम - बार-बार गिरे मावठे से असिंचित भूमि वाले किसानों को फायदा



कार्यालय संवाददाता - रायसेन

जनवरी माह के शुरुआत से ही बारिश और ठंडे मौसम ने गेहंू की फसल को फायदा पहुंचाया है। इससे जिले में गेहंू का उत्पादन बढऩे की संभावना जताई जा रही है, जबकि प्रतिकूल मौसम द्वारा चने को नुकसान पहुंचाने से उसका उत्पादन घटने की स्थिति निर्मित हो रही है।

जिले भर में ४ लाख २५ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोवनी हुई है, जिसमें गेहूं २ लाख २९ हजार हेक्टेयर और चना १ लाख ५५ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है। इसके अलावा मसूर, सरसों सहित अन्य फसलें बोई गई है। जनवरी माह के २९ दिनों में से १२ बार मावठे की बारिश हो चुकी है। इस बारिश से किसानों को सिंचाई करने से भी मुक्ति मिल गई, साथ ही रबी फसलों को उनकी जरूरत के मुताबिक पानी भी मिल गया। सबसे ज्यादा फायदा उन किसानों को हुआ है, जिनकी भूमि असंचित की श्रेणी में आती है। ऐसे किसानों को सिंचाई के लिए मशक्कत नहीं करना पड़ी।

आसमानी बारिश ने उनकी सिंचाई की समस्या को पूरा कर दिया, वहीं सिंचित भूमि वाले किसानों को भी पानी देने से राहत मिल गई। इस तरह किसानों के सिंचाई पर खर्च होने वाले लाखों रुपए भी बच गए हैं। इसके अलावा आए दिन कोहरा छाने और ओस गिरने से गेहंू की फसल सेहतमंद हुई है, जबकि कोहरा और बारिश से चने की फसल को नुकसान पहुंचा है।

कई स्थानों पर बारिश से चने के फूल झड़ गए हैं, जिससे चने का उत्पादन घटने की बात किसान कह रहे हैं।



असिंचित भूमि में फसलों को सबसे ज्यादा फायदा