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2600पुराने स्लीपर इस्तेमाल किए गए एप्रिन के बेस के लिए। इससे रेलवे ने तकरीबन 15 लाख रुपए की बचत की। कंक्रीट बेस के मुकाबले यह मजबूत भी है।545मीटर है एप्रिन की पूरी लंबाई।01करोड़ रुपए...

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - गुना

लगभग 55 दिन के अंतराल के बाद प्लेटफार्म क्रमांक एक को ट्रेनों के लिए पुन: खोल दिया गया है। वॉशेबल एप्रिन के लिए 7 दिसंबर से इसे बंद कर दिया गया था। निर्धारित समय से करीब 10 बाद इसे खोल तो दिया गया। गुरुवार को एईएन सुशील कुमार के अलावा अन्य रेलवे अधिकारियों ने पटरियों की पूजा कर ट्रेनों की आवाजाही शुरू की।

... फिर भी कई काम बचे रह गए

मसलन ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से तैयार नहीं है। साथ ही पानी की पाइप लाइन को बिझाने का काम भी अधूरा है। हालांकि मूल काम पूरा होने से इस पर ट्रेनों की आवाजाही अब शुरू हो सकेगी, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। प्लेटफार्म एक के बंद रहने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। शेष बचे प्लेटफॉर्म पर जगह न होने की वजह से ट्रेनों को घंटों तक आउटर पर खड़ा रखा जाता था। साथ ही लोगों को, खासकर विकलांग व बुजुर्गों को, प्लेटफॉर्म दो पर जाने में बेहद परेशानी हो रही थी। कारण यह है कि रेलवे के फुट ओवर ब्रिज पर आज तक रैंप नहीं बनाए गए हैं।





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दिसंबर को एप्रिन का काम आरंभ हुआ था। इसे 45 दिन में काम पूरा होना था। तय कार्यक्रम के मुताबिक 20 जनवरी को इसे पूरा हो जाना चाहिए था। काम लेट होते देख 25 जनवरी को ऊपर से अचानक निर्देश आए कि एक दिन के भीतर बचा हुआ काम पूरा किया जाए। इसके बाद 25-26 जनवरी की पूरी रात काम चला और इसे पूरा किया गया।

शुरूआत में ट्रायल के तौर पर एक इंजन को चलाया गया। दोपहर बाद ट्रेनों को भी आने दिया गया। इनसेट फोटो : पाइप लाइन का काम करते हुए कर्मचारी। एप्रिन का काम पूरा होने के बाद भी कई काम अब भी बचे हैं।



खुल गया प्लेटफॉर्म नंबर -1