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कोर्ट से बाइक चोरी

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - गुना

चोरों ने फिर दुस्साहस दिखाया और जिला न्यायाधीश के कक्ष के सामने से बाइक उड़ा दी। जिस स्थान पर वारदात हुई वहां हमेशा आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। यानी तगड़ी सुरक्षा वाले परिसर में दिनदहाड़े चोरों ने इस वारदात को अंजाम दिया।

कैंट थाना क्षेत्र में कोर्ट परिसर से चोरों ने फिर बाइक चुरा ली। अज्ञात आरोपियों ने एडवोकेट जितेंद्र धाकड़ की 25 जनवरी को बाइक चोरी कर ली। जितेन्द्र ने वकीलों के साथ थाने पहुंचकर इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। फरियादी के मुताबिक वह घटना वाले दिन दोपहर 12 बजे जिला न्यायाधीश के चैंबर के सामने बाइक रखकर पैरवी के लिए कोर्ट में चले गए। शाम 4 बजे के लगभग जब देखा तो मौके पर बाइक नहीं थी। बाइक गायब देखते ही फरियादी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने इसकी सूचना अपने साथियों को दी। फरियादी ने बताया कि जिस स्थान से उनकी बाइक चोरी गई हैं। वहां हमेशा आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं।

4 माह में आधा दर्जन बाइक चोरी

कोर्ट परिसर से चार माह में आधा दर्जन बाइक चोरी हो चुकी है। इस स्थल से आम लोगों के वाहन भी चोरी गए हैं। जिनमें से कई ने तो शिकायत ही दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा पिछले दो माह पूर्व नीतेश श्रीवास्तव की बाइक भी कोर्ट परिसर से उड़ाई गई। इससे पहले मजहर आलम एडवोकेट व देवेंद्र शिवहरे की भी बाइक गायब हुई। इन वाहनों का अब तक कोई पता नहीं चला है।

चार माह में परिसर से आधा दर्जन बाइक चोरी

एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी तैनात

कोर्ट परिसर में एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए तैनात किए हुए हैं। यह पुलिसकर्मी कोर्ट मुंशी के रूप में कार्यरत हैं। इनके जिम्मे सुरक्षा भी सौंपी गई है। अवकाश होने पर यह अमला गश्त भी देता है।

बड़ा मौका चूके : कुछ अरसे पहले पुलिस ने मेघा ऑटो पाट्र्स पर छापा मारकर बाइक चोरी के एक बड़े नेटवर्क के खुलासे का दावा किया था। इस मामले में शुरूआती तेजी के बाद अब पुलिस हाथ पर हाथ रखकर बैठ गई है। आज तक इस मामले में पुलिस ने कई अहम लोगों के बयान तक दर्ज नहीं किए हैं। जब्त बाइक की फोरेंसिक जांच के लिए टीम तक नहीं आ पाई है।

॥बाइक चेारी हो रही हैं तो आरोपी भी पकड़े जा रहे हैं। लोगों को भी वाहनों की अतिरिक्त सुरक्षा करते हुए हेंडल लाक जरूर लगवाना चाहिए।

-अंतर सिंह कनेश, सीएसपी गुना

खबर छपी तब रिपोर्ट लिखी

एक माह पूर्व जब मेरी बाइक चोरी हुई तो पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कर रही थी। थाना क्षेत्र को लेकर मुझे भटकाया जाता रहा। सिटी कोतवाली वाले कैंट थाने पहुंचा रहे तो कैंट वाले कोतवाली। जब यह खबर दैनिक भास्कर में छपी, तब जाकर रिपोर्ट दर्ज की गई। बाइक मिलने की उम्मीद तो है ही नहीं। - अनुभव मुबार, विंध्याचल कालोनी

कहीं सुरक्षा नहीं

कोर्ट परिसर में तक लोगों की चीजें सुरक्षित नहीं है। पुलिस की भूमिका भी मददगार नहीं रहती। मेरी बाइक चोरी हुई तो मैं कई वकीलों को साथ लेकर एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचा था। इसलिए तुरंत रिपोर्ट भ्ीा दर्ज हो गई। जबकि कई लोगों के बारे में सुनने मिलता है कि पुलिस उनकी रिपोर्ट तक नहीं लिखती। - जितेंद्र धाकड़, वकील

बाइक ही नहीं खरीदी

लगभग डेढ़ साल पहले रेलवे स्टेशन से बाइक चोरी होने के बाद से मैने नई बाइक अब तक नहीं खरीदी है। चोरी होने के बाद पुलिस को उसकी तुरंत सूचना दी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब से अब तक पुलिस ने हमसे संपर्क तक नहीं किया। हम भी उम्मीद छोड़ चुके हैं। - रामसिंह रघुवंशी, घोसीपुरा





दुस्साहस - जिला न्यायाधीश के कक्ष के सामने से उठा ले गए चोर