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पहले खाता खोलो, फिर मिलेगा योजना का लाभ

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता - रायसेन

राजस्व विभाग के एक फरमान ने उन किसानों की नींद उड़ा दी है, जिनके खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में नहीं हैं। इन किसानों को शासन की उन योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब उनके खाता राष्ट्रीयकृत बैंकों में होगा। इन बैंकों में खाते नहीं होने की स्थिति किसानों को किसी भी प्रकार की राशि मिलना मुश्किल हो जाएगा, जबकि जिले के अधिकांश किसानों के खाते जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में हैं और वे इसी बैंक से अपना लेन देने करते हैं। राजस्व विभाग के इस नए फरमान ने किसानों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाता खुलवाने के लिए मजबूर कर दिया है।

बड़ी संख्या में किसान रोजाना राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाते खुलवाने के लिए पहुंच रहे हैं। नए खाते खोलने के लिए इन बैंकों के नियम कायदे और मापदंडों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। खाते खुलवाने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों में कई प्रकार के कागजात मांगे जा रहे है। बैंकों में कागजात उपलब्ध कराने के बाद भी किसानों को कई प्रकार मापदंड बताकर उनके खाते नहीं खोले जा रहे हैं, जिस कारण किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।

१६ डिजिट का खाता हुआ अनिवार्य : राजस्व विभाग द्वारा योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए किसानों से राष्ट्रीयकृत बैंकों के १६ डिजिट का खाता क्रमंाक मांगा जा रहा है। इस प्रकार का खाता क्रमांक उपलब्ध कराने पर ही किसानों को मुआवजा राशि या फिर अन्य योजनाओं की राशि को उन खातों में ट्रांसफर की जाएगी। जिन किसानों के खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में नहीं होंगे, उन्हें योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है।



किसानों को होगी दिक्कत

॥जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखाओं को नेट बैंकिंग से जोड़ा जा रहा है। दो माह बाद सभी प्रकार का लेन देन नेट बैंकिंग के माध्यम से होने लगेगा। लाखों किसान सहकारी बैंक से जुड़े हैं। यदि किसानों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाते खोलने के लिए मजबूर किया जाता है तो सहकारी बैंक में किसानों के खाते बंद होने से कारोबार प्रभावित होगा।

इमरान जाफरी, शाखा प्रबंधक जिला सहकारी बैंक एमई रायसेन

आसानी से हो सके भुगतान

॥ किसानों को ई-पेमेंट के माध्यम से भुगतान होना है, इस कारण किसानों से ऐसे खाते मांगे गए है, ताकि ई-पेमेंट के माध्यम से राशि आसानी से किसानों के खातों में पहुंच जाए। जिले भर में संचालित राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा खाते आसानी से खोले जा रहे हैं।

दीपक पांडे, तहसीलदार रायसेन

ज्वाइंट खाते खोलने में आ रही परेशानी

जिले के अधिकांश किसानों के ज्वाइंट खाते जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में हंै। सहकारी बैंक के ज्वाइंट खाते में ५ से ६ लोगों के नाम जुड़े हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंकों में तीन से अधिक लोगों के नाम से ज्वाइंट खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस प्रकार के नियम कायदों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वे राजस्व अधिकारियों को इस समस्या से अवगत भी करा चुके हंै, लेकिन उनकी इस समस्या से अधिकारियों को कोई लेना देना नहीं है।

क्या कहते हैं किसान

ग्राम इंडोल के किसान रामकृष्ण यादव ने बताया कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खुलवाने के लिए कहा गया है। नया खाता खुलवाने में दिक्कत आने के कारण बड़े भाई का खाता क्रमांक तहसील कार्यालय में जमा करा दिया है। मुरैलकला के किसान मनीराम का कहना है कि अब योजनाओं का पैसा ऑन लाइन खाते में आने वाला है। इस कारण राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खुलवाना पड़ेगा।



जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की जिले भर में १८ शाखाएं और ११४ सहकारी सोसायटी है। बैंक की इन शाखाओं और सहकारी सोसायटियों से करीब डेढ़ लाख से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की सभी शाखाओं में ऑन लाइन बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रकिया चल रही है। कई शाखाओं में कंप्यूटर लगने के बाद वहां पर ऑन लाइन भुगतान की व्यवस्था भी लागू हो चुकी है, लेकिन सभी शाखाओं में दो माह यह सुविधा मिलने लगेगी। इसके बाद भी राजस्व विभाग ने सहकारी बैंक की अपेक्षा राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही किसानों को खाता खोलने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।



ञ्चराष्ट्रीयकृत बैंकों में खाता खोलने किसानों को किया जा रहा है मजबूर

ञ्चखाता नहीं खुलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ी

रायसेन। जिला सहकारी बैंक में खाते खुलवाने के लिए पहुंच रहे हैं किसान।

सहकारी बैंक से जुड़े हैं डेढ़ लाख किसान

नियम - योजनाओं का लाभ लेने के लिए खाता खुलवाना अनिवार्य