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ई-पंचायत के दफ्तर टूटे, लैपटॉप-कंप्यूटर पहुंचे कर्मचारियों के घर

8 वर्ष पहले
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श्योपुर-!- ग्रामीणों की समस्या को जल्द से जल्द निपटाने के लिए शुरू की गईं ई-पंचायत ((प्री-फेब्रिकेटिड)) योजना पूरी तरह से फेल हो गई है। 19 पंचायतों के दफ्तर पूरी तरह से टूट चुके हैं और यहां लगाए गए कम्प्यूटर-लैपटॉप व फर्नीचरों को पंचायत सचिव व रोजगार सहायक अपने घरों पर उपयोग कर रहे हैं। कई जगह तो ई-पंचायतें कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों में बना दी गई है। जबकि जिम्मेदार जिला और जनपद पंचायतों के अधिकारियों ने अब तक इनकी सुध नहीं ली है।

ग्राम पंचायत कराहल, वीरपुर, रघुनाथपुर, अजापुरा, बगडुआ, दांतरदकलां, ढोढर, जैदा, जैनी, जावदेश्वर, ज्वालापुर, ललितपुरा, मेवाड़ा, रायपुरा, तलावदा, तिल्लीपुर, मानपुर, पांडोला, सोंईकलां, ढोढर कुल 19 ग्राम पंचायतों में ई-पंचायतों का प्रोजेक्ट फायनल होने के बाद इन्हें छह माह पहले हैंडओवर किया जा चुका है। हैंडओवर होते ही ई-पंचायतों को भोपाल के एनआईसी ((सूचना एवं जन शिकायत निवारण केन्द्र)) और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ई-नेटवर्किंग से सीधा जोड़ दिया गया। 15 से 20 दिन के भीतर ही पंचायतों के सचिव और रोजगार सहायकों ने इनका सामान गायब कर दिया और सभी ई-पंचायतें देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गईं।

जिले की 19 ग्राम पंचायतों में यह ई-पंचायतें छह माह पहले जिला पंचायत के बीआरजीएफ मद से बनाई थी। ई-पंचायतों की बुनियाद यहां मप्र लघु उद्योग निगम ने रखी। 1 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से बनाई गई यह ई-पंचायतों से अभी तक जनता को कोई लाभ हासिल नहीं हो पाया है। एक भी जगह फेब्रिक दफ्तर से पंचायतों का कामकाज नहीं हो पा रहा है।



जावदेश्वर गांव की ई-पंचायत, जहां खिड़कियों से गायब हो गए हैं कांच

ई पंचायतों पर 1.14 करोड़ हुए थे खर्च

रोक ली है ठेकेदार की राशि

॥ई-पंचायतों के कक्षों का काम करने वाले ठेकेदार की अभी हमने 30 प्रतिशत राशि रोक रखी है। अगर कक्षों का काम ठीक से नहीं किया गया है तो इसमें हम सुधार करवाएंगे।ञ्जञ्ज

रविन्द्र वर्मा, मैनेजर लघु उद्योग निगम, भोपाल

मॉनीटरिंग करने मैं खुद जाऊंगी

॥अगर ई-पंचायतों में कामकाज नहीं हो रहा है और सामान सचिवों और रोजगार सहायकों के यहां रखा है तो यह गंभीर बात है। मैं खुद टीम के साथ मॉनीटरिंग करने जाऊंगी।ञ्जञ्ज

राजेश शर्मा, प्रभारी बीआरजीएफ, श्योपुर

ऐसा हो रहा है तो कड़ा एक्शन लेंगे

॥ई-पंचायतों का अगर यह हाल है तो मैं मातहतों को इनकी चेकिंग कराने के निर्देश देता हूं। साथ ही दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।ञ्जञ्ज

एच पी वर्मा, सीईओ, जिला पंचायत

यह हाल है ई-पंचायतों का

: रायपुरा ग्राम पंचायत की ई-पंचायत के दरवाजे टूट गए हैं। खिड़कियों से इसका बेशकीमती फर्नीचर गायब हो गया है। जबकि यहां के कम्प्यूटर सहित सारा सामान पंचायत सचिव पूरन जाट के घर पर रखा है।

: ज्वालापुर ग्राम पंचायत की ई-पंचायत दफ्तर से बिजली के उपकरण गायब हो गए हैं। कक्ष की देखरेख नहीं होने से जंग लग रही है। यहां के कम्प्यूटर और लैपटॉप पंचायत सचिव खलील अहमद और रोजगार सहायक ने अपने बच्चों के इस्तेमाल में ले रखे हैं।

: सोंईकलां ग्राम पंचायत की ई-पंचायत का भी कमोबेश यही हाल है। यह पंचायत सीप नदी के पास ऊबड़-खाबड़ रास्ते में बनाई है। यहां नदी का पानी भी इसमें घुस गया था। इसलिए सारा सामान यहां से भी गायब है।

: ग्राम पंचायत बगडुआ में तो ई-पंचायत का कक्ष अनुपयोगी सा हो गया है। यहां की सारी खिड़कियां टूट गई है। इसका सामान पंचायत सचिव मो. रफीक के घर पर रखा है।

: ग्राम पंचायत जावदेश्वर में ई-पंचायत के कंप्यूटर और प्रिंटर से रोजगार सहायक पवन मीणा मोबाइल की दुकान चला रहा है। फर्नीचर आदि पंचायत सचिव बृजमोहन रावत श्योपुर स्थित अपने घर पर ले गया है।





पैसे की बर्बादी

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