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नहर से किसानों को दस फरवरी तक नहीं मिल सकेगा पानी

8 वर्ष पहले
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अफसरों का तर्क- बारिश होने से किसानों को नहीं है पानी की जरूरत ।
भास्कर संवाददाता - श्योपुर
बेमौसम बारिश के कारण चंबल दाहिनी मुख्य नहर में कोटा बैराज से छोड़े जा रहे पानी पर रोक लगा दी गई है। 10 फरवरी तक इस नहर में पानी नहीं छोड़ा जाएगा। सिंचाई महकमे के आला अफसरों ने खुद यह रोक लगवाई है। इसलिए कि श्योपुर, मुरैना व भिंड के खेतों में बेमौसम बारिश से फसलों को पानी की जरूरत न होने से किसानों ने इसे लेना बंद कर दिया था। ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों के टूटने की आशंका पनप गई थी। उधर सोईकलां कस्बे के पास 13-एल माइनर शाखा गुरुवार सुबह ओवर फ्लो हो गई, जिसका पानी आसपास के 70 खेतों में भर गया। जिससे लगभग 300 बीघा गेहूं की फसल खराब होने की आशंका किसानों ने जताई है।
मप्र-राजस्थान के बीच करार के तहत कोटा बैराज से चंबल दाहिनी मुख्य नहर में रबी सीजन की फसलों के लिए 3900 क्यूसेक ((क्यूबिक फीट प्रति सेकंड)) के मान से पानी छोड़ा जा रहा था। हालांकि करीब पांच रोज से इस पानी की मात्रा घटकर 3100-3200 क्यूसेक रह गई थी। लेकिन दो दिन हुई भयंकर बारिश के कारण नहर के इस पानी का खेतों में इस्तेमाल लगभग बंद हो गया। किसानों को सिंचाई की जरूरत के मुताबिक पानी बारिश से मिल गया। इसलिए मुरैना व भिंड जिले में इस पानी को नहर से सीधे नदी में छोडऩे की नौबत आ गई। विभाग के अफसरों की मानें तो हालात ये बन गए थे कि यदि नहर में लगातार पानी छोड़ा जाता तो मुख्य नहर से जुड़ीं डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों के टूटने का खतरा बढ़ रहा था। इसलिए कि नहरों में लगातार पानी का दबाव पड़ रहा था और किसानों के खेतों की ओर जाने वाली नहरें बंद की जा चुकी थीं। इस कारण मुरैना, भिंड के सिंचाई अफसरों की रिपोर्ट पर दो दिन पूर्व नहर में जल सप्लाई पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।




नहर में पानी छोडऩे पर रोक लगा दी है

॥कोटा बैराज से चंबल दाहिनी मुख्य नहर में छोड़े जा रहे पानी पर रोक लगा दी गई है। बेमौसम बारिश से किसान नहर का पानी सिंचाई के लिए उपयोग में नहीं ले रहे थे। सोंईकलां के पास माइनर शाखा ओवर फ्लो हुई है, उसके पानी को हमारा अमला नियंत्रित करने में जुटा है।ञ्जञ्ज

राकेश अग्रवाल, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग श्योपुर

चंबल दाहिनी मुख्य नहर गुरुवार को भी लबालब चल रही थी।

सप्लाई बंद फिर भी नहर लबालब

श्योपुर से गुजरी यह नहर लबालब है। इसलिए कि कोटा बैराज से छोड़ा गया पानी बीच में कहीं भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री राकेश अग्रवाल के अनुसार, इस पानी का उपयोग कहां किया जाएगा, इसको लेकर संशय बना है। भिंड और मुरैना में इस बारिश के अधिक होने की वजह से इसका उपयोग टेल एंड तक नहीं हो रहा है।