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हथियारों से लैस माफिया कर रहे सागौन लकड़ी की तस्करी

7 वर्ष पहले
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2012 और 2013 में लकड़ी माफिया से वन अमले की आधा दर्जन से अधिक मुठभेड़ व हमले।
भास्कर संवाददाता - श्योपुर
कैम, बीजा और सागौन की लकड़ी के लिए पहचाने जाने वाले जंगल में अब ठूंठ रह गए हैं। जिले में घुन की तरह चिपके लकड़ी माफिया ने इन जंगलों को उजाड़ दिया है। दो साल में लकड़ी माफिया से आधा दर्जन गंभीर मुठभेड़ें वन अमले की हो चुकी हैं। बावजूद इसके माफिया के हौसले बुलंद हैं। दबी जुबान से वन अमला यह स्वीकारता है कि पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का सहयोग न मिलने की वजह से वह लकड़ी चोरी पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं।
गांव में एजेंट-शहर में कारोबारी : जिले में कैम, बीजा और सागौन की लकड़ी की तस्करी करने वाले लोग शहर में बसते हैं। इनके लकड़ी के टाल शहर में हैं और एजेंट जंगलात के गांवों में। बीती रात मेहरबानी में बाग के जंगल में वन टीम पर हमला करने वाले माफिया के तार भी बगवाज लेकर मेहरबानी तक फैले एजेंट से जुड़े हुए हैं। एक वन अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि माफिया लकड़ी की तस्करी के लिए अंधेरी रात का हथियार बनाता है। जंगल के गुप्त रास्तों से होकर शिवपुरी-श्योपुर हाईवे से कुछ दूरी पर बसे बगवाज में अपने घर तक पहुंचने में वक्त नहीं लेता।
बन आती है जान पर: वन अमला आमतौर पर निहत्था ही जंगल में सर्चिंग करता है, जबकि सागौन, कैम की लकड़ी की तस्करी करने वाले माफिया के लोग हथियारों से लैस रहते हैं। इसलिए सीधे टकराव में वनकर्मियों की जान पर भी बन आती है। 2012 में जब बंबा नाले पर वनकर्मी और लकड़ी माफिया के बीच फायरिंग हुई तो एसएएफ के एक कर्मचारी की गोली से माफिया के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। लेकिन वन अमले के पांच कर्मियों को इस मामले में हत्या का मुकदमा झेलना पड़ा। इन सभी को कई माह जेल में गुजारने पड़े। पुलिस की इस कार्रवाई से वन अमले का मनोबल टूट गया और फिर किसी भी वनकर्मी ने माफिया पर जवाबी हमले का साहस नहीं किया।
25 साल में 25 फीसदी भी नहीं बचे सागौन के पेड़ : मेहरबानी बीट में बाग के जंगल में सागौन लकड़ी माफिया के निशाने पर है। इसी प्रकार ककरधा, बड़ौदा रेंज समेत कराहल वन परिक्षेत्र के जंगलों में कैम, बीजा और सागौन के कुछ क्षेत्र हैं, जहां माफिया दस्तक दे रहा है। बीती रात हमले में घायल हुए गोरस वनचौकी प्रभारी रामजीलाल आदिवासी खुद स्वीकारते हैं कि 25 साल में सागौन इस हद तक काटा गया कि अब न के बराबर ही पेड़ रह गए हैं।




लकड़ी माफिया से बरामद हुई सागौन की लकड़ी।

श्योपुर - जिला अस्पताल में एसडीओपी आलोक वर्मा ने बताया कि लकड़ी माफिया का सरगना बगवाज निवासी सैय्यद खान है। सैय्यद पर 10 से ज्यादा पुलिस और वन विभाग में केस दर्ज हैं। वन विभाग के प्रतिवेदन पर एसपी सालभर पहले ही सैय्यद को जिला बदर करने के लिए कलेक्टर को लिख चुके हैं। लेकिन अभी तक सैय्यद को जिला बदर नहीं किया जा सका है। अगर सैय्यद जिला बदर हो जाता तो आज यह घटना नहीं होती।

आरोपी नहीं पकड़े गए तो कामकाज बंद कर हड़ताल करेंगे वनकर्मी : चौकी प्रभारी रामजीलाल आदिवासी सहित वनकर्मियों पर हुए हमले की वन कर्मचारी संघ ने तीखे शब्दों में निंदा की है। वन कर्मचारी संघ ने पुलिस प्रशासन से 48 घंटे में नामजद और अज्ञात सभी आरोपियों को पकड़कर जेल भेजने की मांग की है। वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कुलदीप तोमर ने बताया कि जंगल में माफिया को रोकने के लिए शासन-प्रशासन सख्त कदम नहीं उठा रहा है, जिसकी वजह से ही यह घटना हुई है। उन्होंने बताया कि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।



मुझ पर पहले हमला किया, फिर राइफल तोड़ दी

॥ चार-पांच लकड़ी माफिया ने मुझे एक साथ पकड़ लिया। पहले कुल्हाड़ी-लुहांगी से हमला किया। मुझे अधमरा करने के बाद मेरी राइफल के दो टुकड़े कर दिए। टीम के सदस्यों से भी मारपीट की गई। पथराव होने से वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।ञ्जञ्ज

रामजीलाल आदिवासी, घटना में घायल गौरस चौकी प्रभारी

कब-कब हुए हमले

ञ्च 25 मार्च 2012 को श्योपुर वनक्षेत्र में बंबा नाले के पास लकड़ी माफिया से वन टीम की मुठभेड़ हुई।

ञ्च 28 अगस्त 2012 को बंबा के पास वन-एसएएफ की लकड़ी माफिया से गोलीबारी, एक युवक की मौत।

ञ्च 12 मार्च 2013 को पारन पुल के पास माफिया ने वन अमले पर हमला किया, एक बाइक जब्त।

ञ्च 02 जनवरी 2014 को ककरधा पश्चिम बीट में कैम लकड़ी काट रहे माफिया से टकरा, लकड़ी जब्त।

नोट : इनमें से तीन मामलों में बगवाज निवासी सैय्यद खान नामजद किया गया।

संकट - वन अमले को पुलिस और प्रशासनिक सहयोग न मिलने से माफिया कर रहा हरियाली का मटियामेट