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जिपं सीईओ की जांच में खुलासा, कागजों में चलते मिले ११ मदरसे
जिला पंचायत सीईओ ने मदरसों की मान्यता खत्म करने का प्रस्ताव भेजने के दिए निर्देश।
भास्कर संवाददाता - भिंड
उर्दू तालीम की आड़ में कुछ मदरसा संचालक सरकार के लाखों रुपए हड़प रहे हैं। कुछ जगह तो मदरसा कागजों में चल रहे हैं तो कुछ जगह बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं का अभाव है। मदरसों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन मैन्यू के हिसाब से नहीं दिया जा रहा है, वहीं बैठने को जगह नहीं है।
जी हां, जिला पंचायत सीईओ ने ऐसे ही एक दर्जन मदरसों की मान्यता खत्म करने के लिए प्रस्ताव मदरसा बोर्ड को भेजने के निर्देश दिए हैं। मदरसा जांच समिति की रिपोर्ट पर फर्जी पाए गए ११ मदरसों को मध्यान्ह भोजन के लिए दी जाने वाली राशि को भी रोक दिया है। सीईओ बीएल अहिरवार ने मदरसों को इस शिक्षण सत्र में मध्यान्ह भोजन के लिए दी गई बीस लाख रुपए से अधिक की राशि वसूली के निर्देश भी दिए हैं। मदरसा जांच समिति ने जिले में संचालित दूसरे ८३ मिडिल और प्राइमरी मदरसों को मध्यान्ह भोजन के लिए दी जाने वाली राशि में भी कटौती करने की सिफारिश की है।
भिंड जिले में करीब ९४ मिडिल और प्राइमरी मदरसे संचालित हैं। शिकायत पर जिला पंचायत सीईओ बीएल अहिरवार ने चार सदस्यीय एक कमेटी का गठन कर मदरसों की जांच कराई तो सामने आया कि ८३ मदरसों में बच्चों के बैठने के लिए जगह भी नहीं है और ११ सिर्फ कागजों में चल रहे हैं। मदरसा जांच कमेटी के प्रतिनिधि जिला शिक्षा अधिकारी आरजे सत्यार्थी, सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक एसबी कबीरपंथी, जिला पंचायत के बरिष्ठ लेखा अधिकारी एलके अवस्थी और समग्र स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक आरके खरे की रिपोर्ट पर जिला पंचायत सीईओ बीएल अहिरवार ने कागजों में संचालित हो रहे ११ मदरसों की मान्यता खत्म करते हुए मध्यान्ह भोजन वितरण के लिए दी गई राशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
८३ मदरसों के खिलाफ क्या कार्रवाई: जिला पंचायत सीईओ ने नियमों से संचालित नहीं होने वाले मदरसों के खिलाफ मध्यान्ह भोजन के लिए दी जाने वाली राशि में कटौती करने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत से अभी तक मध्यान्ह भोजन के लिए मदरसे में दर्ज छात्रों की संख्या में से ६० फीसदी उपस्थिति मानकर राशि जारी की जाती थी, अब दर्ज संख्या को आधा माना जाएगा। आधे में से ५० फीसदी को उपस्थिति के हिसाब से मध्यान्ह भोजन की राशि जारी की जाएगी।
बीस लाख से अधिक की वसूली : जिला पंचायत द्वारा इस शिक्षण सत्र में मध्यान्ह भोजन वितरण करने के लिए करीब बीस लाख रुपए कागजों में संचालित हो रहे मदरसों को दी है। जिला पंचायत से इस राशि की वसूली भी मदरसों से की जा रही है। राशि वसूली के लिए जिला पंचायत से मदरसा संचालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
शिक्षा अधिकारी आरजे सत्यार्थी, सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक एसबी कबीरपंथी, जिला पंचायत के बरिष्ठ लेखा अधिकारी एलके अवस्थी और समग्र स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक आरके खरे की रिपोर्ट पर जिला पंचायत सीईओ बीएल अहिरवार ने कागजों में संचालित हो रहे ११ मदरसों की मान्यता खत्म करते हुए मध्यान्ह भोजन वितरण के लिए दी गई राशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
ये मदरसा चल रहे हैं कागजों में
मकदुमिया सुंदरपुरा भिंड, अलहिलाल गांधी नगर भिंड, शब्बीरिया तालीमुम कुरान गौरी किनारा भिंड, अलसबनम दुलहागन अटेर, ए अली बझपुरी अटेर, मद काबा उर्द देवरी मेहगांव, रौन के ईमान मेहगांव, गरीब नवाज गोहद, इकरा बंगला तिराहा गोहद, प्राइमरी हजरत सुबराती खां बेहद मौ सिर्फ कागजों में चल रहे हैं।
ये हुआ खुलासा
- मदरसों में छात्र पढऩे नहीं आते हैं। उपस्थिति बहुत कम रहती है।
- मदरसों में मैन्यू के हिसाब से मध्यान्ह भोजन नहीं दिया जा रहा है।
- मदरसों का रिकॉर्ड सही नहीं है।
- कुछ मदरसे घरों में संचालित हो रहे हैं।
- मदरसों में दर्ज बच्चों की संख्या के आधार पर बच्चे नहीं है।
मिड-डे-मील के नाम पर मदरसों द्वारा ली गई राशि की होगी वसूली , जो चलते मिले उनमें उपस्थिति न के बराबर
निर्देश दिए हैं
॥मदरसों की जांच कराई गई है। जांच में करीब ११ मदरसे ऐसे मिले हैं, जिनमें बच्चे ही नहीं हैं। ऐसे मदरसों की मान्यता खत्म करने के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। एमडीएम की राशि देने पर रोक लगा दी गई है।
बीएल अहिरवार,सीईओ, जिला पंचायत भिंड
जिला पंचायत कार्यालय। ((फाइल फोटो))