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दशा और दिशा बदलने महिलाएं रखेंगी दुर्गा का रूप
मुलताई - नारी शक्ति देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। नारी को दुर्गा का रूप धारण करके निडर होकर समाज में कार्य करने की जरूरत है। समाज के हर वर्ग में नारियों को सम्मान और उच्च पद प्राप्त हो इसके लिए नारी शक्ति को जागृत होने की जरूरत है। यह बात शुक्रवार को गायत्री शक्ति पीठ में तहसील स्तरीय नारी जागृति सम्मेलन में गौरी बालापुरे ने कही। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल की बहनों ने मातृवंदना से किया। सरकारी कॉलेज की प्राचार्य वर्षा खुराना ने नारियों को शिक्षा के अधिकार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ हमें चेतना जागृत होना जरूरी है। शांतिकुंज प्रतिनिधि रुक्मणि उपाध्याय ने कहा कि गुरुदेव श्रीराम शर्मा ने मनुष्य को गायत्री ((सद्बुद्धि))का अधिकार दिया है। गायत्री हर मनुष्य के लिए पारस पत्थर है।
डॉ. शैला मुले ने प्रथम सुख निरोगी काया विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग-प्राणायाम के साथ प्राकृतिक परिवेश में रहने की समझाइश दी। रेखा शिवहरे और महिला मंडल की निर्मला चौधरी ने कहा कि गुरूदेव ने नारियों को पुरूषों के बराबर का दर्जा दिया है। अब नारियों को अपने अधिकार, कर्तव्य के प्रति जागरूक होकर सामाजिक गतिविधियों में आगे आने की जरूरत है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय से आई देव कन्याओं ने भी अपने विचार रखे। मीना मानकर ने सभी का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में उपस्थित महिलाओं ने गांव-गांव में महिलाओं को जागरूक करने का संकल्प लिया। फोटो 4 और 5
मुलताई। नारी शक्ति ने समाज की दशा और दिशा सुधारने के लिए आगे आने का संकल्प लिया।